भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर संगठनात्मक बदलावों और आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सरकारी आवास पर एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। करीब ढाई घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत कई शीर्ष दिग्गज शामिल हुए। हालांकि, बंद कमरे में हुई इस चर्चा के आधिकारिक एजेंडे को लेकर पार्टी की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके कई बड़े मायने निकाले जा रहे हैं।
यूपी दौरे से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी बैठक
इस बैठक को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आगामी 4-5 जुलाई को होने वाले उत्तर प्रदेश दौरे से सीधे जोडक़र देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के इस शीर्ष नेतृत्व के बीच देश के सबसे बड़े राज्य यूपी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर गंभीर मंथन हुआ है। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ संगठन महामंत्री बीएल संतोष की मौजूदगी यह साफ संकेत देती है कि पार्टी आलाकमान उत्तर प्रदेश में संगठन को नए सिरे से चुस्त-दुरुस्त करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर चुका है।
चर्चा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार की सुगबुगाहटों के बीच भाजपा संगठन को भी पूरी तरह से री-मॉडल करने की तैयारी में है। रणनीतिक रूप से यह माना जा रहा है कि सरकार के कुछ वरिष्ठ चेहरों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में वापस लाया जा सकता है। इसके साथ ही, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस बार अनुभवी दिग्गजों के साथ-साथ ऊर्जावान और युवा चेहरों को संगठन की मुख्यधारा में लाकर एक नया संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है। नई टीम के गठन को लेकर भी इस बैठक में गहन विचार-विमर्श होने की खबरें हैं।
मिशन 2027: उत्तर प्रदेश फतेह करने का खाका
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस यूपी दौरे का मुख्य उद्देश्य साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की चुनावी रणनीति और बिसात को अंतिम रूप देना है। पार्टी राज्य में किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि इस अहम दौरे से ठीक पहले भाजपा ने बीती गुरुवार को अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया था, जिसके तहत राज्य के सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया गया था। इसके साथ ही 19 उपाध्यक्षों और आठ महामंत्रियों की नई नियुक्तियां कर यह साफ कर दिया गया है कि भाजपा चुनावी मोड में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है








