प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे का आज दूसरा दिन है। आज दिन की शुरुआत में उन्हें विक्टोरिया स्थित स्टेट हाउस में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इससे पहले राष्ट्रपति हर्मिनी द्वारा आयोजित राजकीय भोज में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-सेशेल्स संबंधों को स्थिर, मजबूत और दीर्घकालिक बताया। वहीं, राष्ट्रपति हर्मिनी ने भारत को पक्का मित्र और प्रमुख विकास भागीदार कहा।
प्रधानमंत्री ने भारत-सेशेल्स साझेदारी को स्थिर, मजबूत और दीर्घकालिक बताते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर सफलता की दौड़ जीतेंगे। उन्होंने कहा, सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और विजन महासागर का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं।
वहीं, राष्ट्रपति हर्मिनी ने कहा, भारत सेशेल्स का अटूट मित्र रहा है और हमारे लोग और जीवंत भारतीय प्रवासी समुदाय भी इस भावना का हार्दिक प्रतिफल देते हैं। भारत और सेशेल्स ने 1976 में राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद से घनिष्ठ और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध साझा किए हैं, जिसमें नई दिल्ली बुनियादी ढांचे, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एक प्रमुख विकास भागीदार बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मेड इन इंडिया फास्ट पेट्रोल वेसल लेस्पवार को सेशेल्स को सौंपा। उन्होंने कहा, फास्ट पेट्रोल वेसल लेस्पवार का सेशेल्स तटरक्षक बल को हस्तांतरण रक्षा और समुद्री सुरक्षा में भारत-सेशेल्स की बढ़ती साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पोत क्षमता निर्माण की उन पहलों की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है जो सेशेल्स की सुरक्षा प्राथमिकताओं का समर्थन करने और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
भारतीय सेना की एक परेड टुकड़ी सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लेगी। प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कैप्टन आर्यन एच देवोलेकर के नेतृत्व में असम रेजिमेंट की 32-सदस्यीय टुकड़ी नौसेना की टुकड़ी और सैन्य बैंड के साथ मार्च करेगी। यह भागीदारी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों और सैन्य सहयोग के जरिए हिंद महासागर में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।








