अरुणाचल में भारी बारिश से आई बाढ़ ने मचाई तबाही, डूबे कई गांव, हाईवे पुल बहा

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ईटानगर,(आरएनएस)। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश से भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। राज्य के निचले सुबनसिरी और केयी पन्योर जिलों में तेज बारिश के कारण कई गांव पानी में डूब गए हैं। घरों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बह गया। मुख्य हाईवे पुल बह गया है। मौसम विभाग के अनुसार, केवल 3 घंटे (सुबह 6 से 9 बजे) के भीतर ही बहुत तेज बारिश हुई, जिससे नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया और बाढ़ जैसे हालात बन गए।अचानक हुई इस भारी बारिश के कारण लुक्सिन गांव और तोरू सर्कल के अंतर्गत आने वाले यियी-1 और यियी-2 गांवों में बाढ़ आ गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह 6:30 बजे के तुरंत बाद बाढ़ का पानी घरों में घुस गया और खेतों में फैल गया।शुरुआती नुकसान के आकलन से पता चलता है कि लुक्सिन गांव में दुखुम आदि का घर और कई अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। अनानास, केले और संतरे के बागानों सहित खड़ी बागवानी और कृषि फसलें भी प्रभावित हुईं। अधिकारियों ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट अभी तैयार की जा रही है।
यियी गांव सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक था, जहां बाढ़ का पानी बस्ती के बड़े हिस्से में भर गया। स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर आस-पास के घरों में पहुंचाया गया। अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बाढ़ का असर गांवों से आगे तक फैल गया। भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण केयी पैन्योर जि़ले के याज़ाली में पोसा स्थित नीपको कॉलोनी में भारी तबाही हुई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 15 रिहायशी क्वार्टर नष्ट हो गए और एक मुख्य हाईवे पुल बह गया, जिससे इलाके में संपर्क टूट गया।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अचानक आई बाढ़ कई दिनों तक लगातार बारिश के बजाय बादल फटने जैसी तेज़ बारिश के कारण आई। जब कम समय में बहुत ज़्यादा बारिश होती है, खासकर पूर्वी हिमालय के ऊबड़-खाबड़ इलाकों में, तो पानी तेज़ी से पहाड़ों की ढलानों से बहकर नालों और नदियों में चला जाता है। पानी के इस अचानक बहाव से अचानक बाढ़ आ सकती है, भले ही कुल दैनिक बारिश बहुत ज़्यादा न हो।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि पानी से संतृप्त मिट्टी, उफान पर बहती नदियां और लगातार मानसून की गतिविधि के कारण आने वाले दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है।

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