कैब सेवा कंपनी उबर के शेयरधारकों ने कंपनी के निदेशक मंडल और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उन पर आरोप लगाया गया है कि कंपनी की तेज वृद्धि के लिए जानबूझकर नियमों के पालन और सुरक्षा उपायों में कमी की गई। मुकदमे में कहा गया है कि इस लापरवाही की वजह से कंपनी को कानूनी और नियामकीय जोखिमों का सामना करना पड़ा है। शेयरधारकों का आरोप है कि कंपनी ने ग्राहक सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी।
मुकदमे में कहा गया है कि उबर के नेतृत्व ने ग्राहक सुरक्षा और संरक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए। आरोप है कि कंपनी के भीतर ऐसा माहौल बना, जहां नियमों के पालन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इसके कारण यात्रियों को नुकसान पहुंचा और कंपनी पर कई कानूनी समस्याएं खड़ी हो गईं। मुकदमे में कहा गया है कि इस लापरवाही से उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और विकलांग व्यक्तियों से जुड़े कानूनों के उल्लंघन की स्थिति पैदा हुई।
मुकदमा दायर करने वाले शेयरधारकों ने जूरी ट्रायल की मांग की है। साथ ही उन्होंने कंपनी से अपने कॉर्पोरेट प्रशासन और आंतरिक प्रक्रियाओं में सुधार करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि उबर को ग्राहक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। शेयरधारकों के मुताबिक, मजबूत नियम और बेहतर निगरानी व्यवस्था भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने और कंपनी पर बढ़ते कानूनी जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
उबर को यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में पहले भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2022 में 500 से अधिक महिला यात्रियों ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इन महिलाओं ने आरोप लगाया था कि कुछ उबर ड्राइवरों ने उनके साथ अपहरण, यौन उत्पीडऩ, हमला, पीछा करने और अन्य गंभीर अपराध किए। इन मामलों के बाद भी कंपनी की सुरक्षा नीतियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।








