मैसूर के अस्पताल में 11 मरीजों की मौत, लापरवाही का आरोप, मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने दी सफाई

Join Us

मैसूर (कर्नाटक)(आरएनएस)। शहर के एक अस्पातल में 24 घंटे में 11 मरीजों की मौत के बाद डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगे हैं. मामला मैसूर शहर के मेटागहल्ली स्थित जयदेव अस्पताल का है. 24 घंटे में 11 मरीजों की मौत के संबंध में एक वीडियो प्रसारित होने के बाद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सदानंद ने स्पष्टीकरण दिया और आरोपों को खारिज कर दिया.मैसूर के जयदेवा अस्पताल में मंगलवार सुबह 8 बजे से बुधवार सुबह 8 बजे तक भर्ती 11 लोगों की मौत के बारे में मरीजों के रिश्तेदारों ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया था. वीडियो में उन्होंने डॉक्टरों और हॉस्पिटल की व्यवस्था ठीक न होने का आरोप लगाया था. कुछ घंटों में यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया.बाद में अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सदानंद ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, अस्पताल में कोई लापरवाही या डॉक्टरों की कमी नहीं थी. हमारा अस्पताल एक टर्शियरी केयर रेफरल हॉस्पिटल है और मैसूर समेत आस-पास के पांच जिलों से दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को यहां भर्ती किया जाता है. आम मामलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में किया जाता है। सिर्फ जानलेवा स्थिति वाले मरीजों को ही हमारे हॉस्पिटल में रेफर किया जाता है.
उन्होंने माना कि मंगलवार सुबह 8 बजे से बुधावर सुबह 8 बजे के बीच 11 लोगों की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि हालांकि यह संख्या सामान्य से ज्यादा है, लेकिन मरने वालों में से ज्यादातर लोग गंभीर हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और उम्र से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. कुछ की हालत बहुत गंभीर थी जब उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया.
अस्पताल के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 2025 में कुल 21,500 मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से 1,845 मौतें हुईं. अस्पताल में मरीजों की मृत्यु दर 5.7 प्रतिशत है. पिछले कई वर्षों से औसत मृत्यु दर 6 से 8 प्रतिशत है, जो टर्शियरी रेफरल हॉस्पिटल के लिए इंटरनेशनल लेवल पर स्वीकार्य दर है.
डॉ. सदानंद ने इस आरोप को गलत बताया कि अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था. उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर मंगलवार को 24 घंटे ड्यूटी पर था, वह अस्पताल में ही रहा. इसके अलावा, दो ट्रेनी डॉक्टरों समेत कुल तीन डॉक्टर पूरी रात ड्यूटी पर थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने मरीजों को जरूरी इलाज दिया और रिश्तेदारों के लगातार संपर्क में थे. इस आरोप का कोई आधार नहीं है कि वहां कोई डॉक्टर नहीं था. जब डॉक्टर आराम के लिए कमरे में थे, तो खाली कुर्सियों का वीडियो बनाया गया और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई गई. उन्होंने कहा कि हमारे पास इसका सीसीटीवी फुटेज है.
मृतकों के नाम: सैयद आरिफ पाशा (80), हरीश बीआर (40), बालाशंकर (65), समशुन्निशा (70), राजू (54), निंगेगौड़ा (70), मसिना बानू (58), गोपालराजू (55), बैरोजी राव (80), सुहैल खान (43), नीली (79).

Previous articleअमेरिका का दोहरा झटका; कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताया, पैसिफिक कमान से इंडो को हटाया
Next articleसुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए के दो आरोपियों की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा, 2014 से जेल में हैं बंद