टीएमसी में संभावित विभाजन पर जल्दबाजी नहीं, दोनों गुटों को सुनने के बाद फैसला लेंगे : लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

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नईदिल्ली (आरएनएस)। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला टीएमसी के बागी सांसदों के मामले में दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे। स्पीकर के ऑफिस ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी सांसदों के ग्रुप को ईमेल भी भेजा है। इन सांसदों को लोकसभा स्पीकर के साथ मीटिंग के लिए बुलाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद ही स्पीकर बागी गुट से जुड़ा कोई फैसला लेंगे। खास बात यह है कि सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के बागी गुट के 20 सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की थी। एक पत्र सौंपकर अपने गुट का एनसीपीआई में विलय करने का अनुरोध किया था।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ई-मेल भेजकर इस मामले में उसका पक्ष भी मांगा है। इससे पहले संसद से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि लोकसभा अध्यक्ष, अलग हुए सांसदों की, अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय के बाद अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर कानूनी राय ले सकते हैं।
सूत्रों ने कहा कि इस मांग पर कोई भी निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जाएगा, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। उन्होंने बताया कि अलग हुए गुट को मान्यता दी जाए या नहीं, इस पर निर्णय केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जाएगा।
मंत्रालय किसी सीनियर कानूनी अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा। सूत्रों के अनुसार, कानूनी राय इसलिए ली जाएगी ताकि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला, यदि अदालत में चुनौती दी जाती है, तो न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सके। लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचारी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है, सांसद या विधायक नहीं।
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