सरकार की नई प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम के तहत घरेलू एयरलाइंस अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल (्रञ्जस्न) की कीमतें तीन साल तक के लिए तय कर सकेंगी। इसी बीच सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने जेट फ्यूल की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है।
नई व्यवस्था के अनुसार, इस स्वैच्छिक योजना को अपनाने वाली एयरलाइंस को एटीएफ के लिए 115 रुपये प्रति लीटर की निश्चित कीमत चुकानी होगी। इससे पहले यह कीमत 104.927 रुपये प्रति लीटर थी।
जो एयरलाइंस इस योजना में शामिल नहीं होंगी, वे बाजार आधारित दरों पर ही ईंधन खरीदती रहेंगी। वर्तमान में यह दर लगभग 142 रुपये प्रति लीटर है, जो अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों के बराबर है।
सूत्रों के अनुसार, यह योजना पूरी तरह वैकल्पिक है और एयरलाइंस स्वयं तय करेंगी कि उन्हें इसमें शामिल होना है या नहीं। योजना का लाभ लेने वाली एयरलाइंस लॉक-इन अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहेंगी।
वहीं, जो एयरलाइंस इस फ्रेमवर्क से बाहर रहेंगी, उन्हें बाजार मूल्य में गिरावट का लाभ तो मिल सकता है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति में अतिरिक्त लागत का बोझ भी स्वयं वहन करना होगा।








