देशभक्ति के जज्बे, अनुशासन और आत्मविश्वास से सराबोर दीक्षांत परेड ने किया रोमांचित

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 जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति, तकनीकी रूप से दक्ष और संवेदनशील पुलिसकर्मी बनें – डीजीपी कैलाश मकवाणा
भोपाल, (आरएनएस)। देशभक्ति, अनुशासन और जनसेवा के मूल्यों से ओतप्रोत 78वें नव आरक्षकों ने मंगलवार को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में कठिन प्रशिक्षण के उपरांत भव्य दीक्षांत परेड के माध्यम से अपनी दक्षता, अनुशासन और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्य अतिथि परेड की सलामी ली तथा खुली जिप्सी में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। लगभग एक वर्ष के कठिन, अनुशासित एवं बहुआयामी प्रशिक्षण के उपरांत 983 नव आरक्षक विधिवत रूप से मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में शामिल हुए, जिनमें 787 महिला एवं 196 पुरुष नव आरक्षक सम्मिलित हैं। दीक्षांत समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) रवि कुमार गुप्ता, पुलिस आयुक्त इंदौर संतोष कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन अनुराग, पुलिस महानिरीक्षक विसबल इंदौर चंद्रशेखर सोलंकी, पुलिस महानिरीक्षक आरएपीटीसी इंदौर धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, उप पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) पुलिस मुख्यालय मनीष कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक इंदौर ग्रामीण राजेन्द्र कुमार वर्मा, सेनानी प्रथम वाहिनी अभिषेक आनंद, सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार, दिनेश चंद्र सागर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं पुलिस परिवारजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन सभी नव आरक्षकों के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने परेड के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह दीक्षांत परेड प्रदेश के प्रशिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सबसे बड़े एवं प्रभावशाली पासिंग आउट समारोहों में से एक है। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थान की उपलब्धियों, उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था तथा देश के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल होने पर संस्थान के अधिकारियों एवं प्रशिक्षण स्टाफ को बधाई दी। डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति उसके हथियार, अधिकार अथवा कानून नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। जब कोई पीडि़त व्यक्ति पुलिस के पास आता है तो वह केवल कानूनी सहायता नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और न्याय की अपेक्षा लेकर आता है। यह विश्वास किसी नियम पुस्तिका से नहीं मिलता, बल्कि पुलिसकर्मी के व्यवहार, कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण से अर्जित होता है।उन्होंने कहा कि आज अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक अपराधी डिजिटल माध्यमों, मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक एवं स्मार्ट पुलिसिंग के इस युग में पुलिसकर्मी को केवल शारीरिक रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से संतुलित, निर्णयक्षम और नैतिक रूप से दृढ़ होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षण भले ही आज पूर्ण हो रहा हो, लेकिन सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।

 

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