नई दिल्ली (ए.)। मिड ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते युद्ध संकट के बीच भारत सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (क्करूङ्घ) के लाभार्थियों को लेकर एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए सरकार ने सालाना सब्सिडी वाले एलपीजी (रुक्कत्र) सिलेंडर की रिफिल की संख्या को सीधे 9 से घटाकर अब मात्र 4 कर दिया है। यानी अब उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले गरीब परिवारों को साल भर में 642 की रियायती कीमत पर सिर्फ 4 सिलेंडर ही मिल सकेंगे।
सरकार को यह सख्त कदम मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध के चलते उठाना पड़ा है। इस युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें 46 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी हैं। इसी भारी आर्थिक बोझ को नियंत्रित करने के लिए सब्सिडी के नियमों में यह बड़ा बदलाव किया गया है। इस बड़े फैसले के बीच केंद्र सरकार का दावा है कि दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में आए इस भयानक उछाल के बावजूद भारतीय परिवारों को दुनिया की सबसे सस्ती कुकिंग गैस मुहैया कराई जा रही है।
वैश्विक संकट के इस दौर में भी भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत हमारे पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसी दुनिया की सबसे एडवांस और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी कम है।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई लागत का एक बहुत बड़ा हिस्सा सरकार खुद वहन कर रही है और इसका पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर ट्रांसफर नहीं होने दिया गया है।
10 करोड़ से अधिक परिवारों पर सीधा असर, जानिए क्या है नया गणित
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होने के बावजूद सरकार घरेलू गैस के दामों को एक सीमित दायरे में रखने का प्रयास कर रही है। वर्तमान व्यवस्था के मुताबिक, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (क्करूङ्घ) के लाभार्थियों को हर साल रिफिलिंग कराने पर प्रति सिलेंडर ?300 की अतिरिक्त सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।
अब नए नियमों के तहत यह ?300 की छूट साल के पहले केवल 4 सिलेंडरों पर ही लागू होगी, जिससे लाभार्थियों को एक सिलेंडर प्रभावी रूप से ?642 का पड़ेगा। इसके बाद के सिलेंडरों के लिए उन्हें बाजार भाव चुकाना होगा। गौरतलब है कि देश में इस समय 10.58 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन धारक हैं, जिन पर सरकार के इस नए फैसले का सीधा असर पडऩे वाला है।








