रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उसे एक महान देश बताया. इसके साथ-साथ उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का बचाव किया. उन्होंने रूस के साथ सहयोग को लेकर भारत पर दबाव बनाने की अमेरिका की कोशिशों पर मजाक उड़ाते हुए कहा कि ऐसे कदम आपसी और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक हैं.
पुतिन ने आगे कहा कि भारत के अमेरिका के संबंधों से रूस के संबंधों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में मीडिया को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि हमें खुशी है कि भारत सभी देशों के साथ अपने रिश्ते बेहतर कर रहा है. यह एक महान देश है. सबसे बड़े लोकतंत्र और बढ़ती अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए पुतिन ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि वह (भारत) अपनी अर्थव्यवस्था को उन देशों के साथ अपने हितों के अनुसार विकसित करे जिन्हें वह जरूरी समझता है.
उन्होंने आगे कहा कि जब रूस के साथ सहयोग की बात आती है तब अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता है. पुतिन ने कहा कि नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह दबाव कौन डालता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने ऐसी कोशिशें बेकार हैं. उन्होंने आगे बताया कि कैसे भारत और मॉस्को के बीच खास स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है. मैं इस रिश्ते को ऐसे ही बताता हूं. यह कल या एक या पांच साल पहले नहीं हुआ. यह कुछ ऐसा है जिस पर हम दशकों से काम कर रहे हैं.
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि 1947 में, जब सोवियत संघ ने भारतीय गणराज्य के साथ डिप्लोमैटिक संबंध बनाए, तब से हम एक नए देश, एक नए आजाद देश की स्थापना में मदद करने के लिए सब कुछ कर रहे हैं. मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय लोगों की कड़ी मेहनत और टैलेंट की वजह से, भारत ने अपने विकास में बड़ी और जरूरी उपलब्धियां हासिल की हैं. उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बिजनेस 100 अरब अमेरिकी डॉलर के पार होगा.
पुतिन ने कहा कि भारत और रूस दोनों देश मिलकर सिर्फ एनर्जी और परमाणु एनर्जी तक सीमित नही है. हमलोग नए सेक्टर में भी काम करने की प्लानिंग कर रहे हैं. वहीं, भारत के रुख की बात करें तो उसका रुख साफ है कि देशहित में जो फैसला सही होगा, वही लिया जाएगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और आर्थिक जरुरतों को ध्यान में रखते हुए भारत अपने तेल आयात से जुड़े फैसले लेने में कतई संकोच नहीं करेगा.








