-कॉपी का सही मूल्यांकन के लिए एक-एक छात्र को भरना पड़ते हैं दो-दो हजार
नई दिल्ली(ए.)। सीबीएसई 12वीं की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली (ओएसएम) पर उपजा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और तकनीकी घोटाले का रूप ले चुका है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि एक छात्र को अपनी उत्तर पुस्तिका का सही मूल्यांकन कराने के लिए करीब 2 हजार रुपए खर्च करना पड़ते हैं। ऐसे में इस साल करीब साढ़े 18 लाख छात्रों ने परीक्षा दी है। अंदाजा लगाईऐ लाखों छात्रों ने कितना पैसा खर्च किया होगा। राहुल गांधी का आरोप है कि इसके पीछे टेंडर प्रक्रिया में ढील दी गई ताकि इस मोटी रकम का सीधा फायदा एक कंपनी को मिल सके। उन्होंने कहा कि सीबीएसई अब छात्रों की जेब कतर रहा है।
उनका दावा है कि निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में जानबूझकर ढील देकर एक खास निजी वेंडर, सीओईएमपीटी एजू टेक को फायदा पहुंचाया गया, जिसके कारण 18.5 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। राहुल गांधी के अनुसार, मई 2025 के शुरुआती टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखते हुए ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर और 300 डीपीआई रिज़ॉल्यूशन से स्कैन करने की अनिवार्य शर्त थी। लेकिन अगस्त के संशोधित टेंडर में इन शर्तों को हटाकर रिज़ॉल्यूशन को 200 डीपीआई कर दिया गया। आरोप है कि इसके बाद वेंडर ने कॉपियों को पेशेवर स्कैनर के बजाय सामान्य मोबाइल फोन से स्कैन किया। इसके प्रमाण के रूप में छात्रों की कॉपियों पर ड्रॉप शैडो (परछाई) और मोडऩे के निशान साफ देखे गए हैं, जो केवल मोबाइल से फोटो खींचने पर आते हैं। इस तकनीकी लापरवाही के कारण मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी सामने आई है। सोशल मीडिया पर धुंधली कॉपियों, गायब पन्नों और बिना जांचे गए जवाबों के स्क्रीनशॉट की बाढ़ आ गई है।
कई छात्रों को दूसरों की उत्तर पुस्तिकाएं आवंटित होने की भी शिकायतें मिली हैं। इस अव्यवस्था का सीधा असर नतीजों पर दिखा है, जहाँ 12वीं का पास प्रतिशत पिछले साल के 88.39 प्रतिशत से गिरकर 85.2 प्रतिशत रह गया है और कंपार्टमेंट के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, जेबकतरों से सावधान। आज वो सीबीएसई के अंदर बैठे हैं। सीबीएसई की गलती से नंबर गलत आए तो आपको क्या मिलता है? एक बिल, जिसमें 100 रुपए प्रति विषय के हिसाब से डिजिटल स्केन कॉपी, 100 रुपए प्रति पेपर के हिसाब से पुनर्गणना, 25 रुपए प्रति सवाल के हिसाब से पुनर्मूल्यांकन होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी ही उत्तर-पत्रिका की सही जांच के लिए एक बच्चे को 2000 तक भरने पड़ सकते हैं। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, सोचिए, जब 4 लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डालें हैं तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा है। जब स्केनिंग फोन से हुई हो, गलत मार्किंग तय है और उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। गलती सीबीएसई की, सजा बच्चे की और कमाई सरकार की। इससे पहले, राहुल गांधी ने सीबीएसई के कुछ छात्रों के साथ संवाद का वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें उन्होंने रिजल्ट को लेकर चल रहे विवाद पर बातचीत की। छात्रों ने राहुल गांधी से अपनी समस्याओं को लेकर बात की और बताया कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया तो किस तरह उन्हें ट्रोल किया गया। उन्हें देशद्रोही और देश का दुश्मन तक बताया गया।
इसके अतिरिक्त, एथिकल हैकर्स ने दावा किया है कि इस डिजिटल पोर्टल की सुरक्षा इतनी कमजोर है कि कोई भी इंटरनेट यूजर छात्रों की कॉपियों को आसानी से एक्सेस और डाउनलोड कर सकता है। भारी मांग के कारण बोर्ड का पुनर्मूल्यांकन पोर्टल भी लगातार क्रैश हो रहा है। इस पूरे मामले को छात्रों के साथ बड़ी धोखाधड़ी बताते हुए विपक्ष ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।








