तेल-गैस भंडारों का पता लगाने के लिए पूरे देश में नए सिरे से सर्वे करेगी सरकार

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नईदिल्ली(आरएनएस)। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर हुए असर ने सरकार को घरेलू स्तर पर विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है। अब सरकार गैस और तेल के भूमिगत भंडारों का पता लगाने के लिए देशभर में सर्वे कराने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसके लिए कंपनियों को आमंत्रित किया है। इस दौरान जमीन का 3डी सर्वे कर भंडारों का पता लगाया जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक निविदा जारी कर इस काम के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया है। निविदा में कहा गया है कि इसका उद्देश्य पुराने भूकंपीय डेटा को पुन: संसाधित करना और देश भर के तलछटी बेसिनों में नए 3डी भूकंपीय सर्वेक्षण करना है। नोटिस के अनुसार, ये काम ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए किया जा रहा है। इस काम को पेट्रोलियम मंत्रालय के हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय द्वारा किया जा रहा है।
सरकार पुराने डेटा की दोबारा स्टडी कर फिर आधुनिक तकनीक के जरिए सर्वे को अंजाम देगी। अधिकारियों का मानना है कि उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग और आधुनिक डेटा प्रोसेसिंग तकनीकों सहित नई तकनीकें, जमीन के नीचे मौजूद उन संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों का पता लगा सकती हैं, जिन्हें शायद पुराने तरीकों द्वारा स्पष्ट रूप से पता नहीं लगाया जा सका होगा। इसका उद्देश्य नए भूमिगत भंडारों की पहचान करना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। सूत्रों ने सरकारी दस्तावेजों के हवाले से बताया गया कि सरकार पूर्वी तट पर बंगाल-पूर्णिया, महानदी, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी और अंडमान अपतटीय क्षेत्रों को कवर करते हुए एक बहु-बेसिन भूवैज्ञानिक सर्वे की तैयारी कर रही है। सर्वे में बंगाल-पूर्णिया और महानदी सर्वेक्षण में ही 45,000 किलोमीटर की रेखाएं शामिल होंगी। अंडमान बेसिन सर्वेक्षण में 43,000 किलोमीटर की रेखाएं, कृष्णा-गोदावरी में 43,000 किलोमीटर, जबकि कावेरी बेसिन में 30,000 किलोमीटर की रेखाएं जुड़ेंगी। सर्वे करीब 2 साल में पूरा होने की उम्मीद है।दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए हालात के बाद तेल की कीमतें बढ़ी हैं और भारत को अपनी निर्भरता के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उपायों की ओर बढ़ रही है। यही वजह है कि घरेलू स्तर पर उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए सर्वे किया जा रहा है।
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