अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते को लेकर जल्दबाजी न करने का आग्रह किया है। उन्होंने सोशल मीडिया ट्रुथ पर कहा कि ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और इसमें दोनों पक्षों को जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता और उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी।
ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा, ईरान के साथ बातचीत एक व्यवस्थित और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। मैंने अपने प्रतिनिधियों को बता दिया है कि वे किसी डील को लेकर जल्दबाजी न करें, क्योंकि समय हमारे पक्ष में है। जब तक कोई समझौता नहीं होता, उसे प्रमाणित नहीं कर दिया जाता और हस्ताक्षर नहीं होते, तब तक नाकाबंदी लागू रहेगी। दोनों पक्षों को अपना समय लेना चाहिए और सब-कुछ ठीक से करना चाहिए। कोई गलती नहीं होनी चाहिए!
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुए ईरान समझौते को निशाने पर लिया और उसे खराब बताते हुए कहा कि नौसिखियों के समझौते से ईरान को परमाणु हथियार बनाने का मौका मिला। ट्रंप ने लिखा कि अब ईरान के साथ अमेरिका के संबंध अब कहीं ज़्यादा पेशेवर और फलदायी हैं। हालांकि, ईरान को समझना होगा कि वे कोई भी परमाणु हथियार या बम न तो बना सकते हैं और न ही हासिल कर सकते हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच समझौते के वार्ताकार अभी भी कई विवादित मुद्दों पर काम कर रहे हैं और समझौते को अंतिम रूप देने में कई दिन लग सकते हैं। इसमें परमाणु मुद्दा प्रमुख है। व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने समझौते के व्यापक ढांचे का समर्थन किया है, हालांकि तेहरान ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के मुताबिक, ईरान परमाणु हथियार हासिल करने का प्रयास नहीं कर रहा है।
प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, समुद्री प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देना शामिल है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने के बदले में जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है। अधिकारियों ने दावा किया कि ईरान ने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के अपने भंडार को निपटाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है, हालांकि विवरण अभी भी बातचीत के अधीन हैं।वाशिंगटन,25 मई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते को लेकर जल्दबाजी न करने का आग्रह किया है। उन्होंने सोशल मीडिया ट्रुथ पर कहा कि ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और इसमें दोनों पक्षों को जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता और उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी।
ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा, ईरान के साथ बातचीत एक व्यवस्थित और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। मैंने अपने प्रतिनिधियों को बता दिया है कि वे किसी डील को लेकर जल्दबाजी न करें, क्योंकि समय हमारे पक्ष में है। जब तक कोई समझौता नहीं होता, उसे प्रमाणित नहीं कर दिया जाता और हस्ताक्षर नहीं होते, तब तक नाकाबंदी लागू रहेगी। दोनों पक्षों को अपना समय लेना चाहिए और सब-कुछ ठीक से करना चाहिए। कोई गलती नहीं होनी चाहिए!
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुए ईरान समझौते को निशाने पर लिया और उसे खराब बताते हुए कहा कि नौसिखियों के समझौते से ईरान को परमाणु हथियार बनाने का मौका मिला। ट्रंप ने लिखा कि अब ईरान के साथ अमेरिका के संबंध अब कहीं ज़्यादा पेशेवर और फलदायी हैं। हालांकि, ईरान को समझना होगा कि वे कोई भी परमाणु हथियार या बम न तो बना सकते हैं और न ही हासिल कर सकते हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच समझौते के वार्ताकार अभी भी कई विवादित मुद्दों पर काम कर रहे हैं और समझौते को अंतिम रूप देने में कई दिन लग सकते हैं। इसमें परमाणु मुद्दा प्रमुख है। व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने समझौते के व्यापक ढांचे का समर्थन किया है, हालांकि तेहरान ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के मुताबिक, ईरान परमाणु हथियार हासिल करने का प्रयास नहीं कर रहा है।
प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, समुद्री प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देना शामिल है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने के बदले में जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है। अधिकारियों ने दावा किया कि ईरान ने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के अपने भंडार को निपटाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है, हालांकि विवरण अभी भी बातचीत के अधीन हैं।








