ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को बुरी तरह से हिला कर रख दिया है। ईरान युद्ध के बाद कई देशों पर भयंकर तेल संकट मंडराने लगा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। एक तरफ खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, तो वहीं दूसरी तरफ समंदर में भारतीय जहाजों पर भी खतरा बढ़ गया है। हालांकि, इस भारी संकट के बीच भारत के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है और एक नया देश भारत के लिए संकटमोचक बनकर उभरा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर महासंकट और भारत की बढ़ती मुश्किलें
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों पर निर्भर है। देश के लगभग आधे कच्चे तेल की सप्लाई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के रास्ते ही होती है। लेकिन ईरान के आसपास मचे युद्ध और समुद्री सुरक्षा संकट के कारण अब यह अहम जलमार्ग बेहद असुरक्षित हो चुका है। भारत ने सात साल के लंबे अंतराल के बाद अप्रैल में ईरान से तेल आयात दोबारा शुरू किया था, लेकिन अमेरिकी नौसैनिकों की कड़ी घेराबंदी के चलते इस महीने एक भी नया ईरानी कार्गो भारत के तटों तक नहीं पहुंच सका है।
सऊदी अरब से सप्लाई धड़ाम, समंदर में फंसी भारतीय जहाजें
खाड़ी में मचे इस हाहाकार का सीधा असर सऊदी अरब से आने वाले तेल पर भी पड़ा है। सऊदी अरब से भारत को होने वाली तेल की सप्लाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां अप्रैल महीने में भारत को रोजाना करीब 6.7 लाख बैरल तेल मिल रहा था, वहीं अब यह आंकड़ा लुढक़कर महज 3.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय जहाज बीच समंदर में फंसे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में ओमान के पास एक भारतीय झंडे वाले जहाज पर जानलेवा हमला हुआ, जिसके बाद वह जहाज समंदर में डूब गया।
मुश्किल वक्त में भारत का सबसे बड़ा तारणहार बना वेनेजुएला
खाड़ी देशों में बिगड़ते हालात और होर्मुज स्ट्रेट के संकट के बीच वेनेजुएला भारत के लिए एक सबसे बड़े और अहम विकल्प के रूप में सामने आया है। ताजा एनर्जी ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, इस महीने वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया है। अप्रैल की तुलना में मई महीने में भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई में करीब 50 फीसदी का भारी उछाल आया है। ऐसे नाजुक समय में जब खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति लगातार बाधित हो रही है, भारत तेजी से अपने लिए सुरक्षित और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहा है, जिसमें वेनेजुएला सबसे मददगार साबित हो रहा है।








