प्रदेश में गहराता जल संकट, कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल, व्यवस्था सुधार की मांग की

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भोपाल, (निप्र.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में बढ़ते जल संकट को लेकर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जल गंगा संवर्धन जैसे अभियानों के दावों के बावजूद प्रदेश के अनेक जिलों में आमजन गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को जमीनी स्थिति का आकलन कर तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। जीतू पटवारी ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि कई इलाकों में नागरिकों को घंटों टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है, महिलाएं दूर-दूर तक पानी के लिए भटक रही हैं तथा कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम जैसी स्थितियां भी सामने आ रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, सतना, मुरैना, शिवपुरी, खरगोन, बड़वानी और धार सहित अनेक जिले जल संकट से प्रभावित हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय और प्रशासन समस्या के समाधान में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहे हैं।

उन्होंने इंदौर के जनप्रतिनिधियों से सवाल करते हुए कहा कि “स्मार्ट सिटी” के रूप में पहचान रखने वाले शहर में हर वर्ष गर्मी के मौसम में जल संकट क्यों गहराता है। उन्होंने नल-जल योजनाओं की प्रभावशीलता और जल प्रबंधन व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की मांग की। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में “टैंकर माफिया” सक्रिय है और जल संकट के दौरान निजी स्तर पर पानी की आपूर्ति का कारोबार तेजी से बढ़ता है। उन्होंने सरकार से इस पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग की।

रायसेन जिले में पानी की तलाश के दौरान कुएं में डूबने से तीन आदिवासी बच्चियों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने इसे अत्यंत दुखद घटना बताया। साथ ही मृतक बच्चियों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और उचित मुआवजे की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में जल संकट का स्थायी समाधान निकालना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में आपात व्यवस्था लागू की जाए, जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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