दिल्ली में गुरुवार 21 मई से ऑटो और टैक्सी चालकों के अलावा माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्ट चालकों ने भी 3 दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इससे न केवल 3 दिन तक ऑटो और टैक्सी की समस्या रहेगी बल्कि बाहर से आने वाली खाद्य सामग्री और जरूरी सामानों का भी अभाव हो सकता है। इस 3 दिन की हड़ताल से आम जनजीवन पर कितना असर पड़ेगा? आइए, जानते हैं।
यह हड़ताल अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ऑल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने बुलाई है, जिसे सांकेतिक ‘चक्का जाम’ नाम दिया गया है। इस हड़ताल को दिल्ली और आसपास के 70 संगठनों का समर्थन मिला है। संभावना जताई जा रही है कि इससे 16 से 20 लाख वाहन चालक जुड़े हुए हैं। हालांकि, दिल्ली में सभी ऑटो और टैक्सी यूनियन हड़ताल में शामिल नहीं है। फिर भी इसका व्यापक असर दिख सकता है।
ऑटो-टैक्सी चालकों की मांग है कि दिल्ली- एनसीआर क्षेत्र में पिछले 15 सालों से टैक्सी के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही है। चालकों का कहना है कि ओला-उबर-रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब कंपनियां भी लगातार लाभ को घटा रही हैं। अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल का कहना है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति उपकर से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिसे हटाया जाना चाहिए।
गुरुवार को हड़ताल को कई यूनियन ने समर्थन दिया है, जिससे सडक़ों पर ऑटो रिक्शा और टैक्सी कम दिखीं। इसका असर मेट्रो पर दिखा, जहां भीड़ बढ़ गई। दिल्ली- एनसीआर में रोजाना कई जरूरी चीजों की आपूर्ति बाहर से होती है, जो ट्रांसपोर्ट चालकों की हड़ताल से पटरी से उतर सकती है। दिल्ली की आजादपुर जैसी थोक मंडी में बाहरी राज्यों से आने वाली हरी सब्जियां और फल की आवक घटेगी। दूध और पेयजल टैंकर की आपूर्ति पर भी संकट आएगा।
दिल्ली में ऑटो और टैक्सी की हड़ताल के बाद मेट्रो और दिल्ली परिवहन बस में काफी भीड़ हो सकती है। हालांकि, इनके फेरे बढ़ाए जाने की संभावना है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के साथ नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाले यात्रियों को टैक्सी और ऑटो न मिलने से समस्या हो सकती है। दिल्ली आने वाले पर्यटकों को भी ऑटो-टैक्सी न मिलने पर दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।








