सीबीआई ने पेपर लीक मामले में जांच तेज कर दी है। पुणे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से जुड़ी प्रोफेसर मनीषा मांढरे को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है। देशव्यापी परीक्षा में हुई धांधली के मामले में चल रही जांच के तहत, ष्टक्चढ्ढ अधिकारियों ने शनिवार को पुणे में मांढरे के आवास पर पूछताछ की।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर परीक्षा के पेपर के कुछ खास हिस्सों को लीक करने के लिए विषयों को आपस में बांट लिया था। कथित तौर पर केमिस्ट्री से जुड़े सवालों की जिम्मेदारी प्रह्लाद कुलकर्णी पर थी, जबकि प्रोफेसर मनीषा मांढरे कथित तौर पर बॉयोलाजी के सवालों को संभाल रही थीं।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि एग्जाम के पेपर से चुने हुए सवाल एजेंटों के एक नेटवर्क के जरिए लीक किए गए थे, जिसमें मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे और शुभम खैरनार शामिल थे। इसके बाद पेपर छात्रों के बीच बांटे गए थे। सूत्रों का कहना है कि मनीषा वाघमारे और प्रह्लाद कुलकर्णी एक-दूसरे को लातूर के दिनों से जानते थे। कुलकर्णी और मांढरे भी कथित तौर पर हृश्वश्वञ्ज परीक्षाओं के लिए पेपर सेट करने में एक-दूसरे से जुड़े थे।
जांच के दौरान सामने आया कि मांढरे बाद में पुणे के बिबवेवाड़ी इलाके में गंगा ओशियाना सोसाइटी में रहने लगीं, जहां मनीषा वाघमारे पहले से ही रह रही थीं। मांढरे कथित तौर पर अपने घर पर कोचिंग क्लास चलाती थीं, जबकि वाघमारे कथित तौर पर मांढरे और कुलकर्णी दोनों के साथ संपर्क में रहती थीं।
जांच टीम ने खुलासा किया कि मांढरे और कुलकर्णी अपने घरों से कोचिंग क्लास चलाते थे। वाघमारे अक्सर दोनों के घर पर जाती थीं। लीक हुआ पेपर कई एजेंट्स के जरिए आगे बढ़ाया गया था। मनीषा वाघमारे ने वह पेपर धनंजय लोखंडे को सौंपा, जिसने उसे नासिक के शुभम खैरनार को दे दिया।
इसके बाद शुभम खैरनार ने पेपर को गुरुग्राम के यश यादव तक पहुंचाया। वहां से यश यादव ने उसे राजस्थान के सीकर के बिवाल भाइयों के साथ शेयर किया। ष्टक्चढ्ढ इस नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने और कथित पेपर लीक रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए जांच में जुटी है।








