पाकिस्तान में जल प्रलय तय!, सिंधु के बाद दोहरी मार, कश्मीर में अब दो नई सुरंगों पर काम कर रहा भारत

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को लेकर अपनी रणनीति और सख्त कर दी है। एक ओर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर जल संसाधनों और हाइड्रोपावर क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला लेकर यह संकेत दिया है कि सीमा पार आतंकवाद और जल सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अब भारत पहले से अधिक आक्रामक रुख अपनाएगा।
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से पश्चिमी नदियों पर जल प्रबंधन और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म योजनाओं पर काम चल रहा है। इसका उद्देश्य भारत के हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और भविष्य की जरूरतों के लिए जल भंडारण क्षमता बढ़ाना है।
इसी रणनीति के तहत सलाल डैम में बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग यानी गाद हटाने का काम शुरू किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, एनएचपीसी ने ड्रेजिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है और इस वर्ष से बड़े पैमाने पर सिल्ट फ्लशिंग भी की जाएगी। यह अभियान अगले तीन से चार वर्षों तक जारी रह सकता है।
सूत्रों के अनुसार, हर साल लगभग 40 से 50 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद हटाने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे जलाशय की क्षमता बढ़ेगी, पानी के बेहतर भंडारण में मदद मिलेगी और बिजली उत्पादन की दक्षता में भी सुधार होगा।
भारत पश्चिमी नदियों पर अपनी हाइड्रोपावर क्षमता को भी तेजी से बढ़ा रहा है। वर्तमान में एनएचपीसी 2,219 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं का संचालन कर रही है, जबकि 3,514 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को भी बड़े स्तर पर लाभ मिल रहा है। जिन राज्यों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट लगाए जाते हैं, उन्हें परियोजनाओं से 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली दी जाती है। इसके अलावा प्रत्येक बड़ी परियोजना से करीब 5,000 से 6,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। निर्माण कार्य में लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारी स्थानीय राज्यों से ही जुड़े होते हैं।
जम्मू-कश्मीर में तैयार होने वाली स्वच्छ और हरित ऊर्जा का उपयोग केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में सप्लाई किया जा रहा है। इससे राष्ट्रीय पावर ग्रिड को भी मजबूती मिल रही है।
सूत्रों ने बताया कि व्यापक जल प्रबंधन रणनीति के तहत प्रस्तावित दो सुरंग परियोजनाओं के सर्वे का काम पूरा हो चुका है। फिलहाल उनकी व्यवहार्यता रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहलगाम हमले के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ केवल सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि जल और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक रणनीतिक बढ़त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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