मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत के लिए राहत भरी एक बड़ी खबर सामने आई है। भीषण तनाव और भारी ब्लॉकेड की धमकियों के बीच भारत की रसोई गैस लेकर आ रहे दो विशाल मालवाहक जहाज ‘होर्मुज स्ट्रेटÓ के खतरनाक समुद्री रास्ते को सफलतापूर्वक पार करने में कामयाब रहे हैं। इस कामयाबी ने न केवल भारत बल्कि अन्य एशियाई देशों की ऊर्जा सप्लाई को लेकर बनी चिंता की लकीरों को थोड़ा कम कर दिया है।
‘चोरÓ रास्तों और बंद लोकेशन के साथ पार किया मौत का साया
खबरों के मुताबिक, भारतीय हितों के लिए बेहद अहम माने जा रहे ये दो जहाज— ‘स्4द्वद्बÓ और ‘हृङ्क स्ह्वठ्ठह्यद्धद्बठ्ठद्गÓ— गुरुवार को गल्फ ऑफ ओमान में सुरक्षित देखे गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन जहाजों ने किसी जासूसी फिल्म की तरह अपनी लोकेशन बताने वाले ‘ट्रांसपोंडरÓ को पूरी तरह बंद कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाके को पार करते समय अपनी पहचान और लोकेशन छिपाना इन जहाजों की सुरक्षा के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ‘हृङ्क स्ह्वठ्ठह्यद्धद्बठ्ठद्गÓ संयुक्त अरब अमीरात की रिफाइनरी से गैस लोड कर पश्चिम भारत के कांडला पोर्ट की ओर बढ़ रहा है, जबकि ‘स्4द्वद्बÓ कतर से सप्लाई लेकर कांडला के लिए रवाना हुआ है।
मौत के साये में भी जारी है सप्लाई का सिलसिला
तनाव के बावजूद खाड़ी देशों के निर्यातक अपनी सप्लाई चेन को टूटने नहीं देना चाहते। इन दो जहाजों की सुरक्षित वापसी के साथ ही रविवार से अब तक होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले बड़े तेल और गैस जहाजों की कुल संख्या 10 तक पहुंच गई है। इसमें तीन अन्य एलपीजी जहाजों के अलावा चार बड़े क्रूड ऑयल टैंकर और एक एलएनजी टैंकर भी शामिल हैं। हालांकि, खाड़ी देशों के कई निर्यातक और कंपनियां अपनी लोकेशन सार्वजनिक किए बिना ही ईंधन भेजने का जोखिम उठा रही हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल युद्ध टलने के कोई ठोस आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
अमेरिकी नेवी की पैनी नजर और बढ़ती घेराबंदी
समुद्र में सुरक्षा के नाम पर अमेरिकी नौसेना की चौकसी भी चरम पर है। इसी कड़ाई के बीच एक बड़ी घटना भी सामने आई, जहां इराकी तेल लेकर वियतनाम जा रहे सुपरटैंकर ‘्रद्दद्बशह्य स्नड्डठ्ठशह्वह्म्द्बशह्य ढ्ढÓ को अमेरिकी नौसेना ने रोककर वापस मोड़ने पर मजबूर कर दिया। इस समय गल्फ ऑफ ओमान और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास चीन और जापान के कई टैंकर भी अमेरिकी ब्लॉकेड लाइन के पास बेहद सक्रिय देखे जा रहे हैं। ऐसे में भारतीय जहाजों का इस ‘वॉर ज़ोनÓ से सुरक्षित निकलना देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की रसोई के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है।








