नई दिल्ली, (आरएनएस)। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दायर याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को हटाकर नई संस्था गठित करने की मांग की गई है। साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट मांगे जाने की भी अपील की गई है। यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फैमा) की ओर से दायर की गई है। याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में व्यापक सुधार और न्यायालय की निगरानी में परीक्षा दोबारा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की प्रमुख मांगों में कहा गया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को या तो पूरी तरह बदल दिया जाए या उसमें बड़े स्तर पर सुधार कर एक नई, मजबूत, आधुनिक और स्वतंत्र संस्था बनाई जाए। याचिका में नीट-यूजी 2026 परीक्षा दोबारा आयोजित कराने की अपील भी की गई है। याचिका के अनुसार, दोबारा होने वाली परीक्षा की निगरानी न्यायालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति करे। समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने की मांग की गई है। इसके साथ ही समिति में एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक न्याय वैज्ञानिक को शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक देश में राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग नाम की नई संस्था का गठन नहीं हो जाता, तब तक यही समिति परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और स्वीकृति का काम करे। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने को अनिवार्य बनाने की मांग भी की गई है। पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा को लिखित माध्यम के बजाय कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराने का सुझाव दिया गया है, ताकि प्रश्नपत्रों के भौतिक परिवहन से जुड़े जोखिम समाप्त किए जा सकें।राजस्थान में पेपर लीक मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने नीट-यूजी परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया था। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई है।








