युद्ध संकट के बीच पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक, ऊर्जा संकट दूर करने के लिए 5 देशों के अहम दौरे पर जाएंगे प्रधानमंत्री

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ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के संकट और कच्चे तेल की बढ़ती किल्लत की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही पांच देशों के बेहद अहम दौरे पर जाने वाले हैं। बीते दिनों पीएम मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद इस दौरे को भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक बड़ा ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय (रूश्व्र) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इस बहुप्रतीक्षित यात्रा की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए नए मजबूत साझेदारों की तलाश में है।
्रश्व से मिलेगी ऊर्जा की संजीवनी और नया निवेश
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के इस पांच देशों के दौरे का पहला और सबसे अहम पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात (्रश्व) होगा। भारत और यूएई के बीच पहले से ही कई स्तरों पर बेहद मजबूत और रणनीतिक संबंध हैं, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा एक बहुत बड़ा हिस्सा है। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान खास तौर पर ऊर्जा जरूरतों, तेल की निर्बाध आपूर्ति और दोनों देशों के बीच व्यापार व निवेश को नई ऊंचाई पर ले जाने को लेकर अहम चर्चा होगी। इसके अलावा यूएई में रहने वाले लाखों प्रवासी भारतीयों के हितों और उनके योगदान पर भी विशेष तौर पर बात की जाएगी।
यूरोप के 4 देशों के साथ ‘विकसित भारत’ की तैयारी
यूएई के कूटनीतिक दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे, स्वीडन, इटली और नीदरलैंड की अहम यात्रा पर जाएंगे। आगामी नॉर्डियक सम्मेलन के मद्देनजर इन देशों की यात्रा भारत के भविष्य और ‘विकसित भारत’ के विजन के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह चारों देश वैश्विक स्तर पर इनोवेशन (नवाचार) के बड़े हब माने जाते हैं। भारत के तेजी से बढ़ते इनोवेशन इकोसिस्टम को रफ्तार देने में इन देशों का तकनीकी सहयोग मील का पत्थर साबित हो सकता है। सरकार का लक्ष्य इन देशों के साथ मिलकर देश के विकास मिशन को और आगे बढ़ाना है।
1.4 अरब भारतीयों की जरूरतों पर सरकार का पूरा फोकस
देश में मंडरा रहे एनर्जी क्राइसिस (ऊर्जा संकट) के गंभीर सवाल पर प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सरकार का रुख पूरी तरह से साफ किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार का व्यापक दृष्टिकोण और रणनीति पहले की तरह ही मजबूत है। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करना है। इसके लिए वैश्विक बाजार के भारी उतार-चढ़ाव और युद्ध जैसे दुनिया भर के मौजूदा हालातों पर भारत की पैनी नजर लगातार बनी हुई है।

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