भारत ने किया एडवांस्ड ‘अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण, पलक झपकते ही खाक होंगे दुश्मन के कई शहर

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भारतीय रक्षा क्षेत्र से एक बेहद शानदार और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। भारत ने ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल’  तकनीक से लैस अपनी अत्याधुनिक ‘अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण कर पूरी दुनिया में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। इस कामयाबी ने देश की रणनीतिक और रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस मिसाइल के लॉन्च का अद्भुत नजारा पड़ोसी देश बांग्लादेश तक दिखाई दिया, जिसके बाद से ही हर तरफ यह कयास लगाए जा रहे थे कि आखिर भारत ने ऐसा क्या लॉन्च कर दिया है जिसने आसमान में खलबली मचा दी है।
हिंद महासागर में एक साथ साधे कई सटीक निशाने
इस महाविनाशक मिसाइल का परीक्षण ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और रणनीतिक बल कमान  के इस संयुक्त और सफल फ्लाइट टेस्ट के दौरान मिसाइल के कई पेलोड्स ने हिंद महासागर क्षेत्र  के एक बहुत बड़े भौगोलिक इलाके में फैले अलग-अलग टारगेट्स पर अचूक निशाना साधा। टेलीमेट्री, रडार और जहाज-आधारित स्टेशनों ने इस बात की पुष्टि की है कि मिशन के सभी उद्देश्य पूरी तरह से सफल रहे हैं। माना जा रहा है कि यह एडवांस अग्नि-5 या उसकी नई पीढ़ी (जैसे रूद्म2) का परीक्षण है, जिसमें रूढ्ढक्रङ्क क्षमता के साथ संभावित हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (जैसी अत्याधुनिक तकनीक भी शामिल हो सकती है। सरकार के मुताबिक, मिसाइल के लॉन्च से लेकर पेलोड्स के टारगेट से टकराने तक की पूरी प्रक्रिया पर कई जमीनी और समुद्री ट्रैकिंग स्टेशनों के जरिए पैनी नजर रखी गई।
आखिर क्या है दुश्मनों के पसीने छुड़ाने वाली तकनीक
इस सफल टेस्ट ने साबित कर दिया है कि भारत अब एक ही मिसाइल सिस्टम के जरिए दुश्मनों के कई रणनीतिक ठिकानों को एक साथ नेस्तनाबूद कर सकता है। रूढ्ढक्रङ्क तकनीक की सबसे बड़ी खासियत ही यही है कि इसके जरिए एक ही मिसाइल में कई वॉरहेड या हथियार एक साथ ले जाए जा सकते हैं। इस तकनीक की मदद से एक ही समय में अलग-अलग जगहों पर मौजूद टारगेट्स पर अचूक प्रहार करके उन्हें पूरी तरह तबाह किया जा सकता है। इसमें प्रत्येक वारहेड अपनी अलग ट्रैजेक्टरी पर यात्रा करते हुए सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। यह अचूक क्षमता किसी भी दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में बेहद कारगर है, जो भारत की परमाणु निरोधक क्षमता को अभेद्य बनाती है। बता दें कि इससे पहले मार्च 2024 में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत भी भारत अग्नि-5 का रूढ्ढक्रङ्क परीक्षण कर चुका है, लेकिन यह नया टेस्ट और भी ज्यादा एडवांस सिस्टम की पुष्टि करता है।
डीआरडीओ और स्वदेशी वैज्ञानिकों की अथक मेहनत का परिणाम
देश की रक्षा को मजबूत बनाने वाली इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (ष्ठक्रष्ठह्र) की अलग-अलग प्रयोगशालाओं ने देश भर के स्वदेशी उद्योगों के सहयोग से विकसित किया है। शुक्रवार को हुए इस ऐतिहासिक और गौरवशाली परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के तमाम वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के उच्च अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और स्वदेशी तकनीक की इस विराट सफलता के गवाह बने।

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