पिछले महीने आंधी-बारिश में दो बार गेट के पत्थर टूटकर गिरे
आगरा,(ए)। दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शामिल ताजमहल करीब 373 साल पुराना हो चुका है। इस स्मारक के शाही दरवाजे के पत्थर अब दरकने लगे हैं। दरवाजे की दीवारों में कई जगह दरारें आ गई हैं। कुछ पत्थर अपनी जगह से खिसक गए हैं। शाही गेट अब आंधी और बारिश भी नहीं झेल पा रहा। पिछले महीने आंधी-बारिश में दो बार गेट के पत्थर टूटकर गिर चुके हैं। इससे पहले भी ताजमहल परिसर के कई हिस्सों में पत्थर और जालियां टूट चुकी हैं। मुख्य मकबरे के पीछे यमुना नदी की तरफ लगी जालीदार रेलिंग भी तेज बारिश और आंधी नहीं झेल पाई। साल 2020 में यह रेलिंग गिर गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 7 अप्रैल 2026 को आगरा में तेज आंधी और बारिश हुई। इस दौरान ताजमहल के शाही दरवाजे के सफेद और लाल पत्थर निकलकर गिर गए। गनीमत रही कि कोई पर्यटक इसकी चपेट में नहीं आया। 30 अप्रैल 2026 को आगरा में हल्की आंधी और बारिश हुई। इसके बावजूद शाही दरवाजे के सफेद पत्थर के 5 टुकड़े टूटकर नीचे गिर गए। शाही दरवाजा ताजमहल का मुख्य प्रवेश द्वार है। ताजमहल के पश्चिमी और पूर्वी गेट से प्रवेश करने के बाद पर्यटक फोरकोर्ट में पहुंचते हैं। यहां से इसी शाही दरवाजे के जरिए मुख्य मकबरे तक जाते हैं। पहले दक्षिणी गेट से आने वाले पर्यटक भी इसी दरवाजे के सामने पहुंचते थे।
हालांकि, साल 2018 से दक्षिणी गेट बंद है। शाही दरवाजा भी उतना ही पुराना माना जाता है, जितना ताजमहल का मुख्य मकबरा।








