मिट्टी के बर्तन, सिक्के, चूडिय़ां…बेट द्वारका में मिली सदियों पुरानी विरासत

Join Us

 अंडरवॉटर खुदाई से हुए चौंकाने वाले खुलासे
गांधीनगर,(ए.)। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग (यूएडब्ल्यू) की ओर से द्वारका और बेट द्वारका के समुद्री क्षेत्रों में चल रहे ऐतिहासिक एक्सकैवेशन का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। बता दें कि दिसंबर 2025 से शुरू हुए मिशन के तहत अरब सागर की गहराई और तटीय इलाकों में गहराई से तलाशी हुई। इस प्रोजेक्ट के निरीक्षण के लिए खासतौर से आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल (डीजी) यदुबीर सिंह रावत पहुंचे, जिन्होंने पाए गए इन अवशेषों का बारीकी से निरीक्षण किया।
रिसर्च के दौरान कई इसतरह के प्रमाण मिले, जिससे पता चलता है कि प्राचीन काल में बेट द्वारका, रोमन साम्राज्य सहित अन्य विदेशी देशों के साथ समुद्री व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था। ऐतिहासिक ग्रंथों में इस द्वीप का उल्लेख अंतद्र्वीप के रूप में मिलता है, जबकि ग्रीक ग्रंथ पेरप्लस ऑफ द एरीथ्रियन सी में बाराका कहा गया है। अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र विश्व व्यापार के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता था, यह अब सिद्ध हो चुका है।घनी वनस्पति और वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच, अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए इस उत्खनन में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कडिय़ां हाथ लगी हैं, जिसमें जमीन के भीतर पत्थरों से निर्मित प्राचीन संरचनाओं के नमूने, विदेशी मिट्टी के बर्तन, सिक्के और लोहे की वस्तुएं, कांच के मनके और शंख की चूडिय़ों जैसी कलात्मक चीजें शामिल हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार, बेट द्वारका के दक्षिण-पूर्वी तट पर मिले अवशेष संकेत देते हैं कि यहां प्रोटो-हिस्टोरिक (आद्य-ऐतिहासिक) काल से ही लगातार मानव बस्ती अस्तित्व में थी। इस सर्वेक्षण से भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और प्राचीन विश्व के साथ उसके गहरे संबंधों के बारे में अधिक विस्तृत और वैज्ञानिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।

Previous articleसोमनाथ स्वाभिमान पर्व : 11 मई को सोमनाथ पहुंचेंगे पीएम मोदी, ऐतिहासिक समारोह में होंगे शामिल
Next articleमोहब्बत की निशानी ताजमहल के शाही दरवाजे के दरकने लगे पत्थर