हार के बाद भडक़ीं ममता बनर्जी, बोलीं- ‘मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मुझे बर्खास्त करें’; टीएमसी की अहम बैठक से 10 विधायक गायब

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कोलकाता (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने हार को स्वीकार करने से साफ इनकार करते हुए इसे ‘अत्याचार’ करार दिया है। नवनिर्वाचित विधायकों के साथ हुई एक अहम बैठक में ममता बनर्जी का दर्द और गुस्सा एक साथ फूट पड़ा। उन्होंने चुनाव आयोग, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए ऐलान किया है कि जरूरत पडऩे पर वह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत तक लेकर जाएंगी। इसी बीच, विपक्ष का नेता चुनने के लिए बुलाई गई टीएमसी की अहम बैठक से 10 विधायकों की रहस्यमयी गैरमौजूदगी ने बंगाल की राजनीति में नए भूचाल के संकेत दे दिए हैं।

‘हारे नहीं, जबरदस्ती हराए गएज् मैं इस्तीफा नहीं दूंगी’
विधायकों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने सख्त लहजे में कहा कि टीएमसी के जो उम्मीदवार चुनाव हारे हैं, उन्हें जानबूझकर और जबरदस्ती हराया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह चुनाव किसी भी तरह से निष्पक्ष नहीं था।
ममता ने दावा किया कि उनके 1500 से ज्यादा पार्टी कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे उनके सीने में दर्द उठ गया। हार के बावजूद उन्होंने दो टूक कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपना इस्तीफा नहीं देंगी, अगर सरकार चाहे तो उन्हें बर्खास्त करके दिखा दे। उन्होंने कहा कि वह हार कर भी नैतिक रूप से जीत चुकी हैं।
पीएम और गृह मंत्री पर सीधा आरोप, गद्दारों को मिलेगी सख्त सजा
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर चुनाव प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने इसे लोकतंत्र का ‘काला दिन’ बताते हुए अपने नवनिर्वाचित विधायकों से अपील की कि वे विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएं। इसके साथ ही पार्टी के भीतर भितरघात करने वालों को भी खुली चेतावनी दी गई है। ममता ने स्पष्ट किया कि जिन नेताओं ने चुनाव में पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और तुरंत बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बंगाल के बाद अब पूरा ‘इंडिया गठबंधन’ एकजुट होकर यह लड़ाई लड़ेगा।
विपक्ष का नेता चुनने के लिए बुलाई गई थी बैठक, 10 विधायक रहे नदारद
चुनाव में हार के बाद टीएमसी अब विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है। इसी रणनीति को अंतिम रूप देने और विपक्ष का नेता चुनने के लिए ममता बनर्जी के आवास पर पार्टी के 80 नवनिर्वाचित विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बैठक में केवल 70 विधायक ही पहुंचे, जबकि करीब 10 विधायक नदारद रहे। हार के तुरंत बाद विधायकों की इस तरह की अनुपस्थिति ने टीएमसी के अंदरूनी हालात और भविष्य में किसी बड़ी टूट की आशंकाओं को लेकर सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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