कोलकाता, (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने राज्य में नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए राज्यपाल को भेजी गई है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी ) प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा की 207 सीटों की भारी जीत के बाद चुनाव परिणामों को लूट और साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद मंगलवार को अधिसूचना जारी करना एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम है। आयोग की ओर से राज्यपाल को नई सरकार के घटना की अधिसूचना भेज दी गई है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया आयोग की ओर से पूरी हो गई है। इससे स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार सरकार गठन के अगले चरण को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।अधिकारी ने आगे कहा, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि चुनाव के संचालन के दौरान सभी मानदंडों और प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाए। मतदान से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया वैधानिक ढांचे के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित की गई है। उन्होंने आगे कहा, इस अधिसूचना से नव निर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण और अगली सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
इससे पहले ममता ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया, जिससे राज्य में संवैधानिक और राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया। उन्होंने कहा, हम चुनाव हारे नहीं, हराए गए हैं। 100 सीटों पर वोटों की लूट हुई है। चुनाव आयोग का रवैया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण था। प्रजातंत्र की हत्या की गई है। क्या आपको लगता है कि मैं इस्तीफा दे दूं? मैं नहीं जाऊंगी। मैं सडक़ों पर थीं और सडक़ों पर ही रहूंगी।
ममता ने कहा, केंद्र सरकार केवल एक पार्टी की सरकार चाहती है। पूरी दुनिया में गलत मैसेज जा रहा है कि प्रजातांत्रिक तरीके से लड़ाई नहीं हो रही है। हम लोग बाउंस बैक करेंगे। उन्होंने कहा, बंगाल में हम लोगों ने लड़ाई लड़ी है। हमारी लड़ाई भाजपा के साथ नहीं, चुनाव आयोग से थी। जब आयोग ही बिक जाए और अधिकारी एकतरफा काम करे, तो क्या परिणाम होगा? अब मैं आजाद चिडिय़ा हूं। अपने तरीके से काम करूंगी।
भारतीय संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद राज्यपाल की मर्जी तक ही बना रहता है। राज्यपाल ही मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं। संविधान का अनुच्छेद 164 कहता है कि जब कोई मुख्यमंत्री बहुमत या चुनाव हार जाता है, लेकिन इस्तीफा देने से मना कर देता है, तो राज्यपाल उसे पद से हटाकर हस्तक्षेप कर सकते हैं। राज्यपाल एक आधिकारिक आदेश जारी कर वर्तमान सरकार को तत्काल प्रभाव से भंग कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर टीएमसी के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया। टीएमसी की सीटें घटकर मात्र 80 रह गई हैं। ममता इस हार को नहीं पचा पा रही है और लगातार चुनाव आयोग के साथ केंद्र सरकार पर मनमानी और चुनाव में हेरफेर का आरोप लगा रहा है, लेकिन अब गेंद पूरी तरह से राज्यपाल के पाले में है।








