चेन्नई, (आरएनएस)। तमिलनाडु का चुनाव जीतने वाले तमिलगाम वेत्री कडग़म (टीवीके) के प्रमुख थलापति विजय ने कांग्रेस के समर्थन के बाद बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। विजय ने 112 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा और राज्यपाल से बहुमत साबित करने के लिए 2 हफ्ते का समय मांगा। हालांकि, राज्यपाल ने उनको 118 विधायकों के साथ प्रस्ताव देने को कहा है। ऐसे में 7 मई को शपथ-ग्रहण की संभावना नहीं है।तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं। उनको बहुमत के लिए 118 विधायक चाहिए। कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का सशर्त समर्थन दिया है, जिसके बाद उनके पास 113 विधायक हुए, लेकिन विजय के 2 सीटों (पेरम्बूर-पूर्वी त्रिची) से जीते जाने के कारण इसे 112 माना गया है। टीवीके ने कम्युनिस्ट पार्टियों को पत्र लिखा है, उनके पास 2-2 विधायक हैं। अगर उनका समर्थन मिले, तो भी विजय के पास 2 विधायक की कमी होगी।विजय की पार्टी ने कम्युनिस्ट पार्टियों के अलावा विदुथलाई चिरुथिगल काची, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कडग़म से संपर्क साधा है। तीनों ही पार्टियां द्रविड़ मुनेत्र कडग़म के साथ सत्ता में शामिल थीं। इनके पास कुल 5 विधायक हैं। अगर इनका समर्थन मिला, तो विजय का बहुमत का आंकड़ा 121 हो जाएगा। हालांकि, कम्युनिस्ट पार्टी समेत सभी छोटी पार्टियों ने समर्थन पर फैसला करने के लिए 8 मई तक का समय मांगा है। राज्यपाल से मिलने से पहले टीवीके ने 47 विधायकों वाली अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (एआईएडीएमके) से गठबंधन को लेकर बातचीत रोक दी है। पहले टीवीके द्रविड़ पार्टी एआईएडीएमके के अलावा कांग्रेस समेत अन्य छोटी पार्टियों से भी बात कर रही थी। अब टीवीके केवल कम्युनिस्ट पार्टियों और अन्य छोटी पार्टियों के समर्थन का इंतजार कर रही है। कांग्रेस ने अपने समर्थन पत्र में शर्त रखी है कि टीवीके गठबंधन में सांप्रदायिक ताकतों को शामिल नहीं करेंगे।
विजय के शपथ ग्रहण में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई ने उनको निमंत्रण पत्र भेजा है। विजय का शपथ ग्रहण समारोह पहले गुरुवार 7 मई को चेन्नई के नेहरू इंडोर स्टेडियम में होने की संभावना थी, लेकिन राज्यपाल ने विजय से 118 विधायकों के समर्थन के साथ प्रस्ताव पेश करने को कहा है। ऐसे में विजय अपने 9-10 कैबिनेट सहयोगियों के साथ अब 8 मई के बाद शपथ ले सकते हैं।
तमिलनाडु के कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडंकर ने प्रेस को संबोधित कर कहा कि विजय ने अपने मुख्यालय में कांग्रेस पदाधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। वे 5 विधायकों के साथ मिलने गए थे। विजय ने मल्लिकार्जुन खडग़े, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल को फोन कर उनको धन्यवाद दिया और शपथ ग्रहण में बुलाया है। चोडंकर ने समर्थन की बड़ी शर्त बताई कि भाजपा से जुड़ी कोई पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन में शामिल नहीं होगी। उनका इशारा एआईएडीएमके की तरफ था।
कांग्रेस ने विजय की सरकार बनाने की अनौपचारिक जिम्मेदारी अपने कंथों पर उठा ली है और नई-नवेली कम अनुभव वाली पार्टी के लिए सहयोगी पार्टियों से बात करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस टीवीके के लिए डीएमके की सरकार में सहयोगी रहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, वीसीके, डीएमडीके और आईयूएमएल से संपर्क कर रही है। वीसीके सरकार में शामिल होने का निर्णय लेने के लिए गुरुवार को बैठक करेगी। अभी आईयूएमएल ने कोई जवाब नहीं दिया है।
खबर आ रही थी कि एआईएडीएमके के कुछ विधायकों ने महासचिव एडप्पाडी पलानीस्वामी से टीडीपी को समर्थन देने का अनुरोध किया है, जिससे दबाव बढ़ा है। इसको लेकर बुधवार को पार्टी कार्यालय में बैठक होनी थी, जो अचानक स्थगित कर दी गई। इसके बाद विधायक सीवी शनमुगम के रिश्तेदार के घर परामर्श बैठक हुई। बैठक के बाद पार्टी के उपमहासचिव केपी मुनुसामी ने कहा कि टीवीके को समर्थन करने की खबर गलत है, पार्टी किसी परिस्थिति में समर्थन नहीं देगी।
टीवीके को राज्यपाल द्वारा सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘यह चौंकाने वाली बात है कि टीवीके सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद, राज्यपाल ने अभी तक विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया। मैं मांग करता हूं कि लोकतंत्र के हित में, राज्यपाल तत्काल टीवीके नेता को मंत्रिमंडल गठित करने के लिए आमंत्रित करें, ताकि वे विधानसभा में बहुमत साबित कर सकें।’
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में द्रविड़ राजनीति में रची-बसी डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर नहीं उभर सकी। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके ने 108 सीटें हासिल कीं, जबकि एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं। इसी तरह डीएमके सिर्फ 59 सीटों तक सिमट गई और बाकी सीटें कांग्रेस और वामपंथी जैसी छोटी पार्टियों ने हथिया लीं। इस चुनाव में कांग्रेस 5 सीटें जीतने में सफल रही है।








