ने देश के आर्थिक ढांचे, आधारभूत संरचना और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं संबंधी जो निर्णय लिये हैं वह दर्शा रहे हैं कि केवल विकास परियोजनाओं की घोषणा नहीं की जा रही है बल्कि उन्हें विकसित भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य से जोड़ते हुए क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक सशक्तिकरण और राजनीतिक संदेश को भी साधने की कोशिश की जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में ग्रामीण जल आपूर्ति को लेकर जल जीवन मिशन को वर्ष 2028 तक बढ़ाने और उसके लिए आठ लाख उनहत्तर हजार करोड़ रुपये का विशाल प्रावधान करना शामिल है। इस योजना का उद्देश्य अब केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं बल्कि हर गांव में टिकाऊ जल सेवा व्यवस्था स्थापित करना है। सुजल भारत नामक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा बनाकर हर गांव की जल व्यवस्था को स्रोत से नल तक डिजिटल रूप से भी जोड़ा जायेगा। हम आपको बता दें कि वर्ष 2019 में देश के केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल का जल पहुंचा था, जबकि अब यह आंकड़ा 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। इस विस्तार ने ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव किया है। अध्ययन बताते हैं कि करोड़ों महिलाएं रोज पानी लाने के श्रम से मुक्त हुई हैं और अब वे शिक्षा, रोजगार और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर पा रही हैं। स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है क्योंकि स्वच्छ जल से जल जनित रोगों में कमी आयी है। जल जीवन मिशन 2.0 के माध्यम से सरकार ग्रामीण भारत में चौबीसों घंटे जल आपूर्ति का लक्ष्य तय कर रही है, जो विकसित भारत की आधारभूत आवश्यकता मानी जाती है।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े परिवहन प्रकल्पों को भी मंजूरी दी है। मध्य प्रदेश में उज्जैन को दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे से जोडऩे वाले बदनावर पेटलावद थांदला तिमरवानी मार्ग को चार लेन में विकसित करने की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लगभग अस्सी किलोमीटर लम्बे इस गलियारे से यात्रा समय कम होगा और माल ढुलाई सस्ती होगी। आदिवासी बहुल धार और झाबुआ जिलों में यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी तथा उद्योग केन्द्रों से संपर्क मजबूत करेगी।








