राजकोट में 1489 अवैध मकानों पर गरजा बुलडोजर, सडक़ पर आए 50 साल से रह रहे

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गुजरात के राजकोट में रविवार को प्रशासन का बुलडोजर जमकर गरजा। राजकोट नगर निगम (क्ररूष्ट) ने शहर के जंगलेश्वर इलाके में अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू कर दिया है। प्रशासन की इस भारी-भरकम कार्रवाई के तहत इलाके की 1,489 अवैध इमारतों को जमींदोज किया जाएगा। दशकों से बसी इन बस्तियों पर अचानक बुलडोजर चलने से पूरे इलाके में हडक़ंप मचा हुआ है।
डिप्टी सीएम के आदेश पर शुरू हुआ महाअभियान
इस बड़ी कार्रवाई की पृष्ठभूमि में राज्य के शीर्ष नेतृत्व का सख्त रुख है। अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्य के डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी से सीधे आदेश मिलने के बाद ही राजकोट नगर निगम ने जंगलेश्वर इलाके में इस व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान का खाका तैयार किया और उसे जमीन पर उतारना शुरू कर दिया।
नदी किनारे और टाउन प्लानिंग रोड से हटेंगे कब्जे
अभियान की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर तुषार सुमेरा ने बताया कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जंगलेश्वर में अजी नदी के किनारे और म्युनिसिपल टाउन प्लानिंग रोड पर बनी सभी 1,489 संपत्तियों को पूरी तरह से हटाया जाएगा। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई से पहले शनिवार से ही लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से उनके घर खाली करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, कंट्रोल रूम से रखी जा रही नजर
इतनी बड़ी संख्या में मकानों को गिराए जाने के दौरान किसी भी तरह के बवाल से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा इंतजाम किए हैं। भक्तिनगर सर्कल के पास स्थित सेठ हाई स्कूल में 2,500 से अधिक निगम अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की फौज तैनात की गई है। कमिश्नर सुमेरा ने बताया कि हालात की निगरानी के लिए मौके पर ही एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है और वे खुद पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रख रहे हैं। उनका दावा है कि लोग खुद अपना सामान लेकर शांति से घर खाली कर रहे हैं।
दशकों से रह रहे लोगों का दर्द, बोले- ‘अब सडक़ ही हमारा ठिकाना’
एक तरफ प्रशासन इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ अपनी जिंदगी भर की कमाई उजड़ते देख स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और बेबसी है। जंगलेश्वर की गली नंबर तीन में पिछले 43 वर्षों से रह रहे हारुनभाई सुमरा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे और उनकी बहन दोनों दिव्यांग हैं और मजदूरी करके पेट पालते हैं। उन्हें महज दो दिन पहले घर गिराए जाने की सूचना मिली। वहीं, 50 साल से इसी इलाके में रह रहीं हालिनबेन की चिंता भी कम नहीं है। आठ सदस्यों वाले उनके बड़े परिवार को कोई किराए पर मकान नहीं दे रहा है, जिसके चलते अब उनके सामने सडक़ पर ही दिन गुजारने की नौबत आ गई है।

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