रूस और वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद पर भारत ने दिया बयान, मामला पूरी तरह से किया साफ

Join Us

नई दिल्ली (आरएनएस)। रूस और वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारत सरकार ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा है और इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए विभिन्न देशों के विकल्पों पर लगातार काम करता है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की पूरी ऊर्जा नीति का केंद्र बिंदु एक ही है—देश को निरंतर, भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना। इसी कारण भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण (डायवर्सिफिकेशन) कर रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और बदलते वैश्विक हालात के अनुरूप भारत अपनी ऊर्जा रणनीति को लगातार ढालता रहता है।
वेनेजुएला से पुराने संबंध
विदेश मंत्रालय ने बताया कि वेनेजुएला लंबे समय तक भारत का अहम ऊर्जा साझेदार रहा है। वित्त वर्ष 2019-20 तक वह भारत को कच्चा तेल आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल था। हालांकि, उस दौरान लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते भारत को वेनेजुएला से तेल आयात रोकना पड़ा।
बाद में वित्त वर्ष 2023-24 में वेनेजुएला से दोबारा कच्चे तेल का आयात शुरू हुआ, लेकिन प्रतिबंधों के फिर से लागू होने के कारण इसे एक बार फिर स्थगित करना पड़ा। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी पीडीवीएसए  के साथ लंबे समय से साझेदारी रही है।
सरकारी कंपनियां वर्ष 2008 से वेनेजुएला में सक्रिय हैं और वहां अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। सरकार ने दोहराया कि यदि व्यावसायिक और रणनीतिक दृष्टि से अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं, तो भारत वेनेजुएला से कच्चे तेल की संभावित आपूर्ति पर विचार करने के लिए तैयार है।
रूस से तेल खरीद पर भी दो टूक
रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत के निर्णय पूरी तरह राष्ट्रीय हितों और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित होते हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत पहले भी कई बार कह चुका है कि ऊर्जा सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी आधार पर कच्चे तेल व गैस की खरीद तय की जाती है। मंत्रालय ने कहा कि भारत किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण कर रहा है। रूस से तेल आयात भी इसी व्यापक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है और यह फैसला किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि व्यावसायिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
भारत का संदेश साफ
सरकार का कहना है कि चाहे मामला रूस का हो या वेनेजुएला का, भारत का फोकस केवल और केवल देश की जरूरतों पर है। ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित, स्थिर और किफायती बनाए रखने के लिए भारत हर व्यावसायिक विकल्प को खुले मन से परखने की नीति पर काम कर रहा है।

Previous articleपीएम मोदी पर हो सकता था हमला, इसलिए मैंने उन्हें लोकसभा आने से रोका
Next articleअजित पवार की विमान दुर्घटना को लेकर बड़ा अपडेट, ब्लैक बॉक्स से डेटा निकालने की प्रक्रिया शुरू