इंदौर में दूषित पानी से अब तक 17 नहीं 30 मौतें हुईं, सरकार आंकड़ों में कर रही हेराफेरी

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– प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की जनता से अपील, 11 जनवरी को मार्च में हों शामिल
भोपाल,(ए.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौत के आंकड़ों को लेकर कहा कि अब तक 17 नहीं बल्कि 30 मौतें हो चुकी हैं। सरकार के भ्रष्टाचार के कारण लोगों की मौत हो रही है। सरकार मौत के आंकड़ों में हेराफेरी कर रही है। हमारे नेताओं को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा क्योंकि पोल खुल जाएगी। सरकार का आंकड़ा है कि इंदौर में एक व्यक्ति पर पानी का खर्च 10 हजार रुपए है, फिर भी जनता को सही पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वह जनता से अपील करते हैं कि 11 जनवरी को कांग्रेस के साथ निकाले जा रहे मार्च में शामिल हों। उस दिन कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी इंदौर आ सकते हैं।
देवास में एसडीएम आनंद मालवीय को सस्पेंड करने पर पटवारी ने कहा कि जो सच बोल रहा है, उसपर कार्रवाई की जा रही हैं। यह तानाशाही है। एसडीएम ने सही लिखा तो उसको सस्पेंड कर दिया गया। सरकार तानाशाही पर उतर आई है। मनरेगा का नाम बदलने और किसान न्याय यात्रा पर उन्होंने कहा कि हम केंद्रीय कृषि मंत्री के क्षेत्र से किसान न्याय यात्रा निकाल रहे हैं। वह किसान के बेटे हैं। अगर वह किसानों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो कौन उठाएगा। शिवराज सिंह चौहान अगर किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा, तो हम सडक़ पर ही मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हमें जी राम जी योजना के नाम से दिक्कत नहीं है। इन्होंने राज्य को 40 फीसदी पैसे का हिस्सा देने का फैसला लेकर योजना का कत्ल किया। राज्य के पास बजट में इतना पैसा नहीं है। यह सरकार जनता को गुमराह कर रही है।
बता दें पटवारी ने देवास के जिन एसडीएम आनंद मालवीय का जिक्र किया, उन्हें आंकड़ों की गलत जानकारी देने पर निलंबित किया गया है। उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने देवास के एसडीएम आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनियमितता बरतने के आरोपों के आधार पर की गई है, उनकी जगह पर अभिषेक शर्मा को एसडीएम बनाया गया है।
इसी कड़ी में देवास के कलेक्टर ने सहायक ग्रेड-तीन अमित चौहान को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अमित पर भी पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनियमितता बरतने के आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय कार्यों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी और भविष्य में भी ऐसी अनियमितताओं पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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