-जब जनता मदद के लिए आगे आ रही तो नेता और सरकार क्यों नहीं दे रही ध्यान
-आग ने सब छीन लिया, इंसानियत ने सब लौटा दिया: दूसरे दिन भी किसानों ने थामा अग्निपीड़ितों का हाथ
सीहोर। जिले के ग्राम पाटनी में शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात लगी भीषण आग ने दो सगे भाइयों इकबाल और इरफान की पूरी दुनिया पलभर में राख कर दी थी। आधी रात करीब तीन बजे उठी लपटों ने घर, अनाज, नकदी, जेवरात और वर्षों की मेहनत को निगल लिया। आग इतनी विकराल थी कि ग्रामीणों के अथक प्रयास भी नाकाम रहे। जब सुबह हुई तो दो परिवार खुले आसमान के नीचे थे। आंखों में आंसू, चेहरों पर सन्नाटा और दिलों में अनगिनत सवाल थे, लेकिन इस अंधेरे के बीच इंसानियत की रोशनी बुझी नहीं। पहले दिन ग्रामीणों द्वारा जुटाई गई 16 हजार की सहायता के बाद, दूसरे दिन भी आसपास के पांच से छह गांवों के किसान और ग्रामीण आगे आए। चंदेरी के समाजसेवी व किसान एमएस मेवाड़ा स्वयं आगे रहकर सहायता राशि देने की शुरुआत की। श्री मेवाड़ा की प्रेरणा से रामाखेड़ी के किसान मोतीलाल, बिलकिसगंज के प्रीतम मेवाड़ा, मांगीलाल परमार, खामखेड़ा के रावतिया पटेल, सीलखेड़ा के प्रेम बरेला,रत्नाखेड़ी के पप्पू पटेल सहित अन्य किसानों ने मिलकर 25 हजार रुपये की राशि जुटाई। इस तरह दो दिनों में जनसहयोग से कुल 41 हजार रुपये अग्निपीड़ित परिवारों को सौंपे गए, ताकि वे जीवन की नई शुरुआत कर सकें। ज्ञात रहे कि आगजनी में करीब 25 लाख रुपये के नुकसान, पांच लाख नकद, लाखों का लहसुन, फ्रिज-कूलर, गृहस्थी का सामान, चार किलो चांदी और छह तोला सोना सब कुछ राख हो चुका है। किसानों की एकजुटता बनी सहारा इस सामूहिक प्रयास ने साबित कर दिया कि गांवों की आत्मा आज भी जिंदा है। किसी ने 200 दिए, किसी ने 500, तो किसी ने 1000 रुपये छोटे-छोटे योगदान मिलकर बड़ा सहारा बन गए। ज्ञात रहे कि आप जीने की सूचना मिलते ही पहले दिन समाजसेवी और किसान एमएस मेवाड़ा स्वयं गांव पहुंचे थे और पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने के साथ लोगों से मदद की अपील की थी । किसानों और ग्रामीणों की यह एकजुटता सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि टूट चुके हौसलों को फिर से खड़ा करने की कोशिश थी। सरकार से मुआवजे और आवास की मांग समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिला प्रशासन और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि आगजनी में हुए भारी नुकसान को देखते हुए पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दोनों भाइयों को स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जब संकट की घड़ी में किसान और ग्रामीण आगे आए हैं, तो सरकार को भी संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल मदद करनी चाहिए।








