-कांग्रेस अध्यक्ष खडग़े ने सदन में सरकार को घेरा
नई दिल्ली,(ए)। संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन वीबी- जी राम जी बिल 2025 को लेकर भारी राजनीतिक हंगामा देखने को मिला। गुरुवार देर रात करीब 12.30 बजे राज्यसभा में यह बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बिल के पारित होने से पहले विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताया और इसे गरीबों, किसानों और महात्मा गांधी के विचारों के खिलाफ करार दिया। कांग्रेस अध्यक्ष खडग़े ने तो मॉं की कसम खाते हुए यहां तक कह दिया कि मैं मॉं की कसम खाकर कहता हूं कि यह बिल गरीबों की भलाई वाला नहीं है।
दरअसल विपक्ष की मांग थी कि बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाए, लेकिन सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में जोरदार नारेबाजी की। जब उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। इसके बाद विपक्ष की गैरमौजूदगी में सदन ने बिल को पारित कर दिया। इससे पहले बुधवार को लोकसभा में करीब 14 घंटे की लंबी बहस के बाद यह बिल ध्वनिमत से पास हुआ था।
बिल के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर रातभर धरना दिया। टीएमसी सांसदों का आरोप है कि यह कानून महात्मा गांधी के नाम और उनके सिद्धांतों का अपमान है। उनका कहना है कि यह बिल ग्रामीण मजदूरों, किसानों और गरीब तबके के हितों को कमजोर करता है। टीएमसी नेताओं ने इसे जनविरोधी कानून बताते हुए केंद्र सरकार पर गरीबों की अनदेखी का आरोप लगाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने राज्यसभा में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, मैं अपनी मां की और भारत मां की कसम खाकर कहता हूं कि यह कानून गरीबों की भलाई के लिए नहीं है। इससे आम आदमी को नुकसान होगा। खडग़े ने कहा कि सरकार बिना व्यापक चर्चा और सहमति के महत्वपूर्ण कानून पारित कर रही है।
शिवराज ने जताई नाराजगी
वहीं दूसरी तरफ, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को उम्मीद थी कि विपक्ष गंभीर और सकारात्मक बहस करेगा, लेकिन इसके बजाय केवल बेबुनियाद आरोप लगाए गए। मंत्री ने दावा किया कि यह बिल ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए जरूरी है।
दोनों सदनों में बिल पारित होने के बाद राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। वहीं, शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन संसद के दोनों सदन बिना कोई अन्य कार्यवाही किए अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि इस कानून के खिलाफ संसद के बाहर और सडक़ों पर भी विरोध जारी रहेगा।








