दिल्ली में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमसीडी और एनएचएआई को दिया ये सुझाव

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नई दिल्ली (आरएनएस)। दिल्ली-एनसीआर में गहराते प्रदूषण के संकट और ट्रैफिक जाम की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली नगर निगम (रूष्टष्ठ) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (हृ॥्रढ्ढ) को निर्देश दिया है कि वे राजधानी में प्रवेश करने वाले 9 प्रमुख टोल कलेक्शन बूथों को शिफ्ट करने पर गंभीरता से विचार करें। कोर्ट का मानना है कि इन टोल नाकों पर गाडिय़ों की लंबी कतारें और उनसे निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक बड़ा कारण है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने सुझाव दिया कि इन टोल बूथों को एनएचएआई के नियंत्रित क्षेत्रों में शिफ्ट किया जा सकता है ताकि जाम से निजात मिल सके। कोर्ट ने यह भी विकल्प रखा कि टोल वसूली का काम एनएचएआई द्वारा किया जाए और राजस्व को दोनों एजेंसियों के बीच साझा कर लिया जाए। विशेष रूप से दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर स्थित एमसीडी टोल प्लाजा का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया गया कि यहां घंटों लंबा जाम लगता है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि आज के दौर में फिजिकली टोल वसूलने की जरूरत क्यों है
उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जब पता है कि अगले साल भी स्थिति ऐसी ही रहेगी, तो आप दो महीने के लिए इन टोल बूथों को बंद क्यों नहीं कर सकते कोर्ट ने इस मसले पर एक हफ्ते के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (ष्ट्रक्तरू) और एमसीडी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम को प्रदूषण के मुख्य स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को यह बताना होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाले ट्रैफिक जाम की स्थिति से निपटने के लिए उनके पास क्या ठोस योजना है।
दूसरी तरफ, प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने भी बड़े प्रशासनिक फैसले लिए हैं। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने ऐलान किया है कि गुरुवार से राजधानी के सभी सरकारी और निजी संस्थानों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम (ङ्खशह्म्द्म स्नह्म्शद्व ॥शद्वद्ग) अनिवार्य होगा। इसके अलावा, ग्रैप-3 (त्रक्र्रक्क-3) पाबंदियों के चलते निर्माण कार्य बंद होने से प्रभावित पंजीकृत मजदूरों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। श्रम विभाग ने फैसला लिया है कि काम बंद रहने के दौरान प्रभावित मजदूरों के बैंक खातों में सरकार सीधे 10,000 रुपये की मुआवजा राशि भेजेगी।
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