मां नर्मदा और तवा के संगम स्थल बांद्राभान मेला विशेष
-डिप्टी कमिश्नर बांसुरी ने लगवाई थी कृषि और औद्योगिक प्रदर्शनी
-नर्मदा और तवा के संगम स्थल की कई विशेषताएं करती हैं आकर्षित
बलराम शर्मा
नर्मदापुरम। जनपद पंचायत के रिकार्ड में बांद्राभान मेला लगने का इतिहास 199 वर्ष पुराना दर्ज है। जनपद के रिकार्ड अनुसार 1825 से मेला लगते आ रहा है। तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर श्रीबांसुरी ने बांद्राभान के मेले में कृषि और औद्योगिक प्रदर्शनी का शुभारंभ कराया था। तब से लेकर अब तक यह मेला भव्यता की ओर बड़ता जा रहा है। यह मां नर्मदा की ही कृपा है कि शासन की ओर से कोई विशेष मदद नहीं किए जाने के बाद भी यह मेला निरंतर लगता आ रहा है। इस पवित्र स्थान शदियों से आकर्षण का केंद्र रहा है। तभी तो यहां पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव जैसे भव्य आयोजन सफलता पूर्वक होते रहे है जो कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.अनिल माधव दवे ने शुरूआत की थी। उनके मरणोपरांत भी एक बार यह आयोजन हो चुका है। उस समय निरंतर आयोजन की बातें हुई थी लेकिन आयोजन नहीं हो सके। नर्मदा तट पर नर्मदांचल का बांद्राभान सबसे बड़ा मेला रहता है। जिसमें तीन प्रांतों के लाखों लोग आते हैं।
नर्मदा तट के प्रसिद्ध ऐतिहासिक,धार्मिक व पर्यटन स्थल नर्मदा और तवा के संगम स्थल बांद्राभान जिसे अब मिनी प्रयाग के रूप में लोग मानने लगे हैं। यहां पर जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत रायपुर के द्वारा कार्तिक मेला का आयोजन हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर किया जाता है। अब प्रशासन की पहल से कुछ विभाग सहयोगी की भूमिका निभाने लगे हैं। मुख्य मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ही रहता है। यहां पर महाराष्ट्र सहित विभिन्न प्रांतों के साथ ही प्रदेश के अनेक जिलों के लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। दो दिन पूर्व से ही यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचना प्रारंभ हो गए हैं।
दक्षिणावर्त होती हैं नर्मदा
नर्मदा तट के इस स्थान की हरी भरी वादियों से परिपूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य की छटा,जिसमें इस स्थान पर दो नदियों का मिलन,विंध्याचल पर्वत की समीपता सहित विशाल रेतीले मैदान का होना भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा इस स्थान पर नर्मदा का एक विशेष रूप यह भी देखने को मिलता है कि यहां पर नर्मदा दक्षिणावर्त होती हैं। इसी कारण यहां पवित्रता,आत्मीयता और शालीनता से सराबोर माहौल बना रहता है।
तीन लाख श्रद्धालुओं की संभावना
कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिनों में करीब तीन लाख श्रद्ध़ालुओं के पहुंचने का अनुमान है। तीन दिवसीय मेला होने से पहले दिन यहां पर सुबह से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया था। मुख्य स्नान और मुख्य मेला के अवसर पर कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर सूर्य की पहली किरण और चंद्रमा की चांदनी के नीचे स्नान के महत्व को ध्यान में रखते हुए मेला स्थल पर विशेष सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं। बांद्राभान के रेतीले मैदान में क्षेत्र का यह सबसे बड़ा मेला रहता है। यहां पर मेला के साथ भजन कीर्तन के आयोजन भी होंते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं हजारों लोग
मेला स्थल पर बीते दो दिनों से आसपास के ग्रामीण अंचल के लोग अपनी ट्रैक्टर ट्राली और चार पहिया वाहन से आकर तंबू तान रहे हैं। रेतीले मैंदान में दाल बाटी बनने का क्रम कल से शुरू हो चुका था। कई लेाग अपने परिजनों के साथ डेरा लेकर आए हुए हेैं। इनमें कई भजन मंडलियां भी शामिल हेैं। जो पूरी रात भजन गाते हैं। यहां पर हजारों लोग भगवान सत्यनारायण की कथा कराने के लिए भी आते हैं। जिसमें महाराष्ट्र, मप्र, और उप्र सहित अनेक स्थानों के लोग शामिल हेैं।
अर्जुन ने प्रवाह रोकने की थी कोशिश
बांद्राभान के तट को लेकर अनेक किवदंती है जिनमें एक यह भी है कि धनुधारी अर्जुन ने यहां पर इस स्थान पर नर्मदा के प्रवाह को रोकने का प्रयास किया था जिसमें वे सफल नहीं हो सके थे। उस स्थान पर आज भी पत्थर की शिलाएं आज भी बड़ी संख्या में चट्टान के रूप में पड़ी हुई हैं। इस स्थान पर नर्मदा जी का वेग विशेष तेज अौर कल कल की ध्वनि भी तेज रहती है।
इनका कहना है-
बांद्राभान एक विशेष तीर्थ स्थान है इस मेला का पुराना इतिहास है। अंग्रेजों के जमाने से इस मेला का इतिहास मिलता है। यह मुख्य रूप से धार्मिक स्थान और ऐतिहासिक महत्व का प्रमुख स्थान है। दो नदियों के संगम के कारण इस स्थान की और अधिक पवित्रता है।
भूपेंद्र चौकसे, अध्यक्ष जनपद पंचायत नर्मदापुरम






