पहले दिन 3151 के भाव मिले बासमती धान को
नर्मदापुरम। खरीदी के मुहुर्त पूजा के अवसर पर शुक्रवार को कृषि उपज मंडी में तौल कांटे की पूजन के बाद खरीदी के कारोबार का कार्य शुरू हुआ। हर वर्ष दूज पूजा का मुहुर्त के साथ खरीदी शुरू होती है। उसी परंपरानुसार खरीदी पूजा के बाद पुन: कारोबार प्रारंभ किया गया है। पं सुनील भार्गव के द्वारा पूजन अर्चन कराई गई मंडी सचिव रामनाथ इवने और शहर के अनेक गल्ला व्यापारियों ने उत्साह से हिस्सा लिया। मंडी सचिव इवने ने बताया कि मुहुर्त पूजन के बाद से मंडी में खरीदी शुरू हो गई है। इसके साथ ही मुहूर्त के सौदे मंडी में हर दिन होंगे। गौरतलब है कि जिले में धान की बंपर पैदावार के कारण मंडी में अच्छी आवक होने की संभावना है। इस अवसर पर व्यापारी संघ के राम नवलानी, अजय खन्ना, बबलू राठौर, अमरसिंह राजपूत, हरि मीना, प्रमोद राठौर, राकेश कपिल मीना, मनीष साहू, विक्रम सिंह राजपूत, व कृषि उपज मंडी के कर्मचारी, वेयरहाउस संचालक, हम्माल ने तौलकांटो का पूजन कर किसानों द्वारा लाई गई उपज की खरीदी शुरू की। पहले किसान का फूल माला पहना का स्वागत किया।
मुहूर्त पूजा करके शुरू हुई खरीदी 3151 के भाव बिकी धान
कृषि प्रधान जिले में सैंकडों की संख्या मेें अनाज व्यापारी हैं। पूजन कर खरीफ मौसम की फसलों की खरीदी शुरू कर दी है। जिले के व्यापारी लाखों क्विंटल अनाज खरीद कर महानगरों से लेकर अन्य प्रदेशों में बड़ी बड़ी कंपनी मिलर तक पहुंचाते हैं। बासमती चावल की खेप तो विदेशों तक जाती है। हर वर्ष अनाज का करोड़ों का कारोबार हाेता है। जिले में तीन फसलें ली जाती हैं तीनों सीजन में व्यापारी किसानों से खरीदी करते हैं। शासकीय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त कई किसान सीधे व्यापारियों को भी अपना अनाज बेचते हैं। जिले में चार बड़ी मंडी के अलावा 4 छोटी उप कृषि उपज मंडी में सैंकड़ो की संख्या में व्यापारियों ने पंजीयन कराते हुए लायसेंस प्राप्त किए हैं। कई व्यापारी मंडी के अतिरक्ति बाजार में अपनी दुकान लगाकर खुल्ले में खरीदी करते हैं। मुहूर्त पूजन के बाद अब किसान भी अपनी उपज लेकर व्यापारियों के पास पहुंचेगे।
किसानों से सीधा संपर्क
पुराने अनाज व्यापारियों का किसानों से सीधा संपर्क है। एक दूसरे को पहचानते हैं। इस आधार पर भी कई किसान अपने परिचित व्यापारी को अपना अनाज नगद में बेच देते हैं। यदि समर्थन मूल्य पर ज्यादा राशि मिल रही है तो शासकीय खरीदी केंद्र पर अनाज बेचते हैं। नहीं तो अपने संपर्क वाले व्यापारियों को अनाज बेचा जाता है।
इनका कहना है-
‘‘प्राचीन परंपरा के अनुसार कार्तिक शुक्ल दूज के अवसर पर खरीदी के मुहुर्त की पूजा की जाती है लेकिन अवकाश के कारण शुक्रवार को मुहुर्त पूजन हुई है। हम सभी व्यापारियों ने ूदूज पर ही अपने-अपने प्रतिस्ठान में तौल कांटे की पूजन कर खरीदी की शुरूआत कर चुके है।
अजय खन्ना, वरिष्ठ अनाज व्यापारी नर्मदापुरम इटारसी।






