राठौर समाज सिंधी समाज सहित अनेक समाजों के श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र शीतला माता मंदिर
देवी के साथ भोलेनाथ, गणेश जी, हनुमान जी भैंरों बाबा की प्रतिमाएं हैं स्थापित
बलराम शर्मा
शहर के मध्य में इंदिरा चौक के पास स्थित मां सीतला माता, मां मोती माता का प्रसिद्घ व प्रचाीन देवी स्थान हैं। यहां का शताधिक वर्षों से अधिक पुराना इतिहास है। मान्यता है की मोती माता का जिले में यही एकमात्र स्थान है। जहां पर जल चढ़ाने से मोतीझिरा से पीड़ित व्यक्ति ठीक हो जाता है। यहां पर वर्ष भर जल चढ़ाने वालों का तांता लगा रहता है। विशेष रूप से यहां पर शारदीय और चैत्रीय दोनों नवरात्र के दिनों में देवी मां की विशेष आराधना होती है। यहां पर राठौर समाज, सिंधी समाज, सहित अन्य समाज के लोगाें के द्वारा पूजन अर्चन विशेष रूप से किए जाते हैं।
मंदिर का संक्षिप्त इतिहास
इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मूल रूप से ये राठौर समाज की कुल देवी का स्थान है। प्राचीन समय में बुजुर्ग लोग घर में मोतीझिरा की बीमारी होने पर पूर्व में यहां पर मढ़िया में विराजमान देवी प्रतिमा पर जल चढ़ाने आते थे। जिससे उन्हें पूरा स्वास्थ्य लाभ मिलता था। शताधिक वर्ष पूर्व से यह परंपरा चली आ रही है। इसी कारण इस देवी मां का नाम मोती माता के नाम पर जाना जाता है। पहले जरूर यहां छोटी मढ़िया थी लेकिन अब इस स्थान पर बढ़िया मंदिर बन गया है। यहां बारह महिने भजन -कीर्तन और अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। मंदिर बनवाने में अहम भूमिका निभाने वालों में पं प्रकाश तिवारी और कपिल चौकसे का कहना है कि मोती माता के साथ अब इस स्थान पर शीतला माता, काली जी, भगवान भोलेनाथ, गणेश भगवान भैरों बाबा और हनुमान जी की प्रतिमा होने से अब शहर के बीचों बीच यह एक बड़ा धार्मिक स्थान बन चुका है। दोनों नवरात्र के दिनों में ज्योति व जवारे की स्थापना की जाती है। यहां पर विभिन्न धार्मिक उत्सव के दौरान दोनों नवरात्र शरद पूर्णिमा, नर्मदा जयंती, महाशिवरात्री, शीतला सप्तमी, शीतला अष्टमी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश उत्सव के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें सैंकड़ों लोग भाेजन प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस मंदिर से शहर के सभी लोगाें का जुड़ाव है।






