मां नर्मदा के तट पर गुफा में विराजमान हैं देवी हिंगलाज माता

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::::: नवरात्र महोत्सव ::::: मातारानी के मंदिर की महिमा :::::

मन से मन्नत मानने वालों की मुराद पूरी करती हैं मातारानी

बलराम शर्मा

नर्मदापुरम। मां नर्मदा के पावन तट के खर्राघाट पर स्थित प्राचीन देवी मंदिर हिंगलाज मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। यहां पर माता रानी करीब 9 फीट नीचे गर्भगुफा में विराजमान हैं। प्राचीन काल से शारदीय और चैत्रीय दोनो नवरात्र में यहां पर सुबह से देर शाम तक देवी भक्तों की चहल पहल बनी रहती है। क्योंकि यह धार्मिक स्थल प्राकृतिक वातावरण से परिपूर्ण होने के साथ ही शहर से तीन किलोमीटर दूर सुगम मार्ग होने से यहां पर नवरात्र के अलावा भी भक्तों का आना जाना वर्ष भर लगा रहता है। मां नर्मदा का तट होने के साथ ही विशाल रेतीला मैदान और एक साथ सड़क मार्ग के दो तथा तीन रेल के पुल होने से यहां मंदिर के पास सुहावना व दर्शनीय स्थान बना हुआ है। जो एक बार यहां पहुंच जाता है उसकी इच्छा बार-बार जाने की होती है। लोग यहां पर देवी मां के दर्शन के साथ ही पिकनिक भी मनाते हेैं। कई लोगों के द्वारा यहां पर भंडारे के आयोेजन किए जाते हैंं। मंदिर समिति के द्वारा भी हर वर्ष भंडारा किया जाता है।

9 फीट नीचेे गुफा में विराजमान हैं देवी मां

देवी मां की प्राचीन प्रतिमा गुफा में जमीन के स्तर से करीब 9 फीट नीचे विराजमान हेैं। जहां पर एक साथ पांच लोग ही नीचे बैठकर पूजन अर्चन दर्शन कर सकते हैं। इस तलघर वाले वातावरण में पहुंच कर माथा टेकने के दौरान एक अलग ही शांति का एहसास होता है। यहां पर भोलेनाथ भी विराजमान हैं। एेसी मान्यता है कि यहां पर मन से मन्नत करने वालों की मुराद मातारानी पूरी करती हैंं।

मंदिर का संक्षिप्त इतिहास

चर्चा के दौरान देवी मां के पुजारी पं भवानी प्रसाद तिवारी ने बताया था कि 1970 में देवी मां की प्राचीन प्रतिमा स्थापित थी। जहां पर एक साधु पूजन करते थे। एक छोटी मढिया बना कर रहते थे। लेकिन तीन वर्ष बाद ही 1973 की भीषण बाढ़ के समय सब कुछ नष्ट हो गया। देवी मां की प्रतिमा भी रेत और भसुआ में नीचे दब गई। सब भूल गए। उसके बाद यहां पर नर्मदा तट के पास ही रेल का पुल बनना शुरू हुआ। पुल का कुछ हिस्सा बन गया था। लेकिन एक पिल्लर नहीं बन पा रहा था। बार- बार टूट कर गिर रहा था। तब परेशान होते हुए ठेकेदार ने नर्मदा तट पर पूजन की और उसके बाद देवी मां से प्रार्थना की तब उसी दिन उसे रात में स्वप्न में मां ने कहा कि यहां पर देवी मां का स्थान है इस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया जाए। ठेकेदार ने दूसरे दिन से ही मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू किया उसी के साथ पिल्लर भी बन गया। पूर्व में डीआरएम भी यहां पर आए हैं उन्होंने भी कहा था कि यह रेलवे की जगह है यहां पर रेलवे के माध्यम से सर्किट हाउस जैसा स्थान बनाया जाए। लेकिन अधिकारी कह चले गए हुआ कुछ नहीं। यदि सार्थक पहल हो तो यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ एक बहुत अच्छा पर्यटन केंद्र भी बन सकता है।

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