314 वर्ष पूर्व हर्णे परिवार के पूर्वजों को देवी मां ने स्वप्न में दिए थे दर्शन

Join Us

-::::: नवरात्र महोत्सव :::::-मातारानी के मंदिर की महिमा :::::

बस्ती की रक्षा करती है, मां खेड़ापति प्रसिद्ध है मातारानी का पवित्र स्थान

बलराम शर्मा

नर्मदापुरम। नर्मदा तट के समीप शहर के मध्य स्थित प्राचीन खेड़ापति मंदिर की अनेक विशेषताओं में एक विशेषता यह भी है कि यहां पर माता शीतला देवी की मढिया के साथ ही माता गौरी, गणेश, शंकर और मातारानी स्थापित हैं। दोनों नवरात्र के दौरान पूरे नो दिनों तक यहां पर विशेष पूजन अर्चन और जल चढ़ाने वालों का तांता लगा रहता है। अष्टमी और नवमी पर माता का विशेष श्रंगार होता है। मंदिर को फूलों से सजाते हैं। माता को शीतलता पहुंचाने के लिए दही, चावल का लेप लगाया जाता है। चना और अन्न का भोग बनाकर चढ़ाया जाता है। चुनरी अर्पित की जाती है।

दूल्हा दुल्हिन लेते हैं आशीर्वाद

विवाह मुहुर्त के दौरान विवाह से पूर्व और विवाह के तुरंत बाद शहर के अधिकांश दूल्हा दुल्हिन पूजन करने और आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं। गाजे बाजे के साथ नव दंपत्ति यहां पर आर्शीवाद लेना नहीं भूलते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। शहर का सबसे प्रसिद्ध देवी मंदिर यही है।

मंदिर का संक्षिप्त इतिहास

जब खेड़ापति माता की मढ़िया बनी थी। उस समय बस्ती बहुत छोटी थी। क्योंकि अब से करीब 314 वर्ष पूर्व पेशवा सेनाओं के पढ़ाव के दौरान हर्णे परिवार के सदस्य इस स्थान पर आए थे। उनके परिवार के लोग बताते हैं कि उस समय इस स्थान के पास हर्णे परिवार के सदस्य भी रात गुजार रहे थे। तब मातारानी ने स्वप्न दिया था कि यहां पर नीम के पेड़ के पास मेरा स्थान है। सुबह नीम के पेड़ के पास जाकर देखा तो जमीन के अंदर देवी जी की मूर्ति मिली। उसके बाद हर्णे परिवार ने यहां पर देवी मां की स्थापना व पूजन अर्चन की। उसके बाद से यह स्थान देवी स्थान के रूप में आज भी पूजनीय है। पहले एक छोटी मडि़या बनाई उसके बाद मंदिर के निर्माण की पेशकश की थी। अनेक श्रद्धालुओं ने मिलकर यहां पर खेड़ापति माई का मंदिर बनवा दिया। यह बात पूर्व मंत्री स्व. मधुकर राव हर्णे ने भी बताई थी। उन्होंने बताया था कि हमारे पूर्वजों ने खेड़ापति माता के स्वप्न में दर्शन देने की पूरी कहानी बताई थी। उन्होने ही बताया था कि यहां पर माता की सेवा का कार्य उसी समय से मेहरा परिवार के द्वारा किया जा रहा है। अभी भी यह परंपरा जारी है। उन्होने कहा कि प्राचीन समय से देवी पूरे खेडे अर्थात बस्ती की रक्षा करती है। इस कारण भी खेडापति नाम रखा गया है।

Previous articleविमान के लैंडिंग गियर में छिपकर भारत पहुंचा 13 साल का बच्चा
Next articleस्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के तहत कार्यक्रम जारी