नई दिल्ली,(ए)। गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार करीब 30 दिन हिरासत में रखे गए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने यदि खुद कुर्सी नहीं छोड़ी तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। ऐसे प्रावधान करते हुए तीन विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किए गए, जिन्हें सदन ने संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक माना जा रहा है कि जिस तरह दिल्ली के सीएम रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने जेल में रहकर भी पद नहीं छोड़ा, भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह कानून लाया जा रहा है। इस बीच केजरीवाल के डिप्टी सीएम रहे मनीष सिसोदिया ने इस विधेयक में यह भी जोडऩे की बात कही है कि यदि गिरफ्तार किया गया मंत्री या मुख्यमंत्री निर्दोष साबित हो तो उसे जेल भेजने वाले सीएम या पीएम को सजा दी जाए।मनीष सिसोदिया ने इस बिल को लेकर एक लेख साझा करते हुए एक्स पर लिखा- इस कानून में यह व्यवस्था भी होनी चाहिए कि अगर कोई मंत्री या मुख्यमंत्री झूठे आरोपों में जेल भेजा जाता है और बाद में वह बरी हो जाता है तो गिरफ्तार करने वाले अधिकारी, एजेंसी के मुखिया और सरकार के मुखिया (पीएम या सीएम जो भी उस समय रहे हों) को उतने साल जेल भेजा जाए जितने साल की सजा वाले झूठे आरोप उस वक्त लगाए गए थे।सिसोदिया ने कहा कि सिर्फ मंत्रियों या नेताओं के लिए क्यों? किसी भी आम आम आदमी को झूठे केस में जेल भेजने वालों को भी जेल भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता के पास ताकत होना जरूरी है लेकिन इस ताकत का दुरुपयोग करने वालों को अगर सजा नहीं मिलेगी तो इस निरंकुश ताकत का अहंकार सबको रावण बना देता है।
बता दें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए। विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री को ऐसे अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है, तो वे 31वें दिन अपना पद छोड़ देंगे।








