–==================
आर्यसमाज के वेदप्रचार सप्ताह में वेदकथा श्रवण कर रहे श्रद्धालु
——————————
सोहोर ।ईश्वर प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन,आंतरिक ह्दय की पवित्रता है।प्राणवायु को रोक देने से,मन की गति पर भी विराम लग जाता है,दोनों के मध्य गहरा सम्बंध है,यह उदगार बिजनौर उ.प्र.से पधारे वैदिक विद्वान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने बुधवार को महर्षिदयानंद मार्ग गंज स्थित आर्य समाज मंदिर में जारी वेद प्रचार सप्ताह के दौरान व्यक्त किए।उन्होंने गुरुवार को प्रातः कालीन सत्र में अष्टांग योगांगों यम,नियम,आसन, प्राणायाम,प्रत्याहार धारणा,ध्यान समाधि की सारगर्भित व्याख्या करते हुए पंच महाभूतों भूमि, जल,अग्नि,वायु आकाश के गुणों की अत्यंत सुंदर व्याख्या की।आचार्य वेदार्थी ने बताया कि पूर्णअहिंसक व्यक्ति का सानिध्य पाकर हिंसक प्राणी भी अपनी हिंसाव्रति का त्याग कर देता है।
इसके पूर्ण दैनिकयज्ञ के उपरांत प्रसिद्ध भजनोपदेशक प.भीष्म आर्य ने मर्यादापुरूषोत्तम श्रीराम, यौगेश्वर श्रीकृष्ण,महर्षि दयानंद सरस्वती के उत्तम जीवन चरित्र को प्रेरक द्रष्टांतों से प्रस्तुत किया ईश्वरोपासना के भक्ति तथा राष्ट्र प्रेमगीतों व भजनों की संगीतमयी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब दाद बटोरी,उनके गीत”बस वही जानता है जीने की कला,जो चाहे प्राणीमात्र का भला”ने श्रताओं का मनमोह लिया।संचालन आर्य समाज के प्रधान नरेश राठौर ने किया। कार्यक्रम में वैदिक प्रवक्ता संतोष सिंह,पूर्वप्रधान एस.गौर, मंत्री रितेश आर्य,उपप्रधान तरूण जगवानी,रमेश राठौर,राजेन्द्र राठौर,रामदयाल राठौर,अरूषेन्द्र शर्मा बाबूलाल राठौर,राजकुमार राठौर,संदीपआर्य,अनूपकौशल, हेमराज प्रजापति चंद्रप्रकाश आर्य,सूर्यकांत आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्यजन श्रद्धालु, महिलाएं शामिल रहीं। शांतिपाठ,जयघोष से कार्यक्रम का समापन हुआ।गौरतलब है कि 18से 24 अगस्त तक नित्य प्रातः एवं सायं 08 से 10 बजे तक यज्ञ उपरांत वेद विषयक व्याखान का क्रम जारी है।








