सीहोर। दोराहा, झरखेड़ा और श्यामपुर से दोराहा जोड़ के आसपास हाइवे के दोनों ओर किसानों से जमीन खरीदकर उन पर अवैध कालोनियां काटकर प्लाट बेचना शुरू कर दिया है। यह काम क्षेत्र में इन दिनों जोर शोर से चल रहा है। यह सब कुछ प्रशासन की अनदेखी के कारण हो रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से लंबे समय से बड़ी संख्या में कालोनियां काटकर प्लाट बेचे जा रहे है। इसको लेकर जनहित मोर्चा के उपाध्यक्ष एवं ब्लाक सेवादल अध्यक्ष खुमान सिंह गुर्जर ने कहाकि अगर एक सप्ताह में इन भू-माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि अहमदपुर, चांदबढ़, चरनाल सहित अन्य स्थानों पर अवैध कालोनाइजर अपने पैर पसार रहे है।
उन्होंने कहाकि क्षेत्रवासियों ने उन्हें बताया कि इन अवैध कालोनियां में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है, यह भू माफिया लोगों को सुविधा के नाम पर दिखावा कर चांदी काट रहे है। लोग अपनी मेहनत की जमा पूंजी यहां पर लगा रहे हैं, लेकिन इस तरह की कालोनियों में न तो डायवर्सन हैं और न ही दूसरी सुविधाएं। कुछ कालोनाइजरों के पास डायवर्सन तो है लेकिन रेरा से अनुमति है। इसके बाद भी प्लॉट बेचे जा रहे हैं और सब कुछ खुलेआम चल रहा है। कृषि भूमि पर काटी जा रही अवैध कालोनियों पर स्थानीय राजस्व प्रशासन कार्रवाई करने से बचता नजर आ रहा है। इसके बाद भी खेतों में फसलों के स्थान पर कालोनियां काटी जा रही हैं। श्यामपुर, झरखेडा सहित दोराहा जोड़ पर अवैध कालोनियों की संख्या बढ़कर तीन गुना हो गई है। खेतों में कॉलोनियां काटने का धंधा खूब फल-फूल रहा है, जिन खेतों में फसलें लहलहाती थीं, उन खेतों में अब कालोनियां नजर आ रही हैं। अधिकतर कॉलोनियों में न तो बिजली है और न ही पानी, सड़क, नालियां, पार्क और मंदिर की सुविधा है। इसके बाद भी प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
उनका कहना है कि कॉलोनी का रास्ता मुख्य मार्ग से लिंक होना चाहिए। जिस जमीन पर कॉलोनी बनना है वह विवादित नहीं होना चाहिए। जिसके नाम पर लाइसेंस जारी होता है। उसके नाम पर कम से कम 25 फीसदी जमीन का हिस्सा होना चाहिए। सीवरेज, पानी का प्रबंध, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि होना चाहिए। कॉलोनी के लिए सभी 15 विभागों से एनओसी जरूर मिली हो। इसमें पीडब्यूडी, वन विभाग, बिजली विभाग आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। टाउन कंट्री प्लानर को सीएलयू के लिए आवेदन दिया हो। सीएलयू मिलने से पहले डीटीपी द्वारा कॉलोनी काटे जाने वाली जगह का निरीक्षण किया गया हो। इन अवैध कालोनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी है। कुछ साल पहले जरूर इस तरह की कार्रवाई हुई थी, उस समय कई कालोनियों पर जेसीबी चलाई गई थी। लेकिन इसके बाद इस तरह की सख्त कार्रवाई नहीं की गई है, धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं।
भू.कारोबारी किसानों से एक साथ कृषि भूमि खरीद लेते हैं। इसके बाद बिना डायवर्सन और अन्य जरूरी अनुमतियां लिए बगैर प्लाट काटकर उन्हें बेचने लगते हैं। इस तरह से मोटा मुनाफा कमाने में लगे। इससे जहां लोगों को सही प्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं तो वहीं यह कारोबारी अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बेतरतीब नियम विरुद्ध काटी जा रही कालोनियों के चलते मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।








