विभिन्न आजीविका गतिविधियों से बनी ‘लखपति दीदी’

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सफलता की कहानी

अपनी मेहनत एवं शासन योजनाओं की सहायता से श्रीमती रश्मि मीना ने खोले आर्थिक सशक्तिकरण के द्वार

नर्मदापुरम/ आजीविका मिशन से जुड़कर महिलाओं के जीवन में हो रहे बदलाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण ग्राम सोनासांवरी की निवासी श्रीमती रश्मि मीना ने प्रस्तुत किया है। वर्ष 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनके पति खेती और इलेक्ट्रिशियन का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, जबकि रश्मि मीना पिको-फॉल एवं सिलाई का कार्य करती थीं।

आजीविका मिशन से मिली नई दिशा

समूह से जुड़ने के बाद श्रीमती रश्मि मीना ने आरसेटी प्रशिक्षण संस्था, नर्मदापुरम से सीएससी आईडी संचालन एवं ‘वन जीपी वन बीसी’ का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने समूह से ऋण लेकर अपनी पंचायत में सीएससी केंद्र स्थापित किया और मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, इटारसी शाखा में बीसी सखी का कार्य प्रारंभ किया, जिससे उन्हें प्रतिमाह 5,000 से 6,000 रुपये की आय होने लगी।

इसके साथ ही उन्होंने समूह से 25,000 रुपये का बैंक ऋण लेकर सेनेटरी नैपकिन री-पैकेजिंग यूनिट प्रारंभ की, जिससे उनकी मासिक आय में 2,000 से 2,500 रुपये की वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त, ईसीआरपी के रूप में आजीविका मिशन से प्राप्त ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्य करने पर उन्हें 2,500 से 3,000 रुपये अतिरिक्त मानदेय मिलने लगा।

परिवार की बढ़ी आमदनी

रश्मि मीना ने समूह से बैंक ऋण लेकर अपने पति के लिए ग्राम सोनासांवरी में इलेक्ट्रिक शॉप भी खोल दी। कृषि एवं अन्य कार्यों को मिलाकर उनके परिवार की मासिक आय 25,000 से 30,000 रुपये तक पहुंच गई और वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो गईं।

सशक्त और प्रेरणादायक व्यक्तित्व

आज श्रीमती रश्मि मीना न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हैं बल्कि ग्राम में सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। उन्हें मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ भी मिल रहा है। वे गांव की अन्य समूह सदस्य महिलाओं को भी विभिन्न आजीविका गतिविधियों में जुड़ने की सलाह देती हैं। श्रीमती रश्मि मीना ने आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस मिशन ने उनके जीवन में स्थायी आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है।

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