कोलकाता (आरएनएस)। एक बार फिर बारिश के बीच अपने वहीं चिरपरिचित अंदाज में तृणमूल सुप्रीमो व बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को लोगों ने सडक़ों पर देखा। देश भर में बांग्ला बोलने वालों के कथित उत्पीडऩ के खिलाफ महानगर के सडक़ों पर ममता दीदी कदमताल कर रही थीं।
एक विशाल जनरैली भी दीदी के पथ की अनुगामी बनी हुई आज दिखी। जिनमें तृणमूल के सर्व भारतीय महासचिव, सांसद व सीएम के भतीजे अभिषेक बनर्जी से लेकर राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम से लेकर मंत्री अरुप विश्वास ही नहीं बरन ममता बनर्जी कैबिनेट के तमाम वरीय मंत्री ही नहीं पार्टी के वरीय नेता भी शामिल हुए। रैली के क्रम में डोरीना क्रॉसिंग स्थित मंच से ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए बंगाली पहचान और संस्कृति पर कथित हमलों के खिलाफ मोर्चा खोला और जमकर भाजपा पर हमलावर हुईं। सीएम ममता ने बंगालियों की पहचान की रक्षा के लिए लगातार और देश भर में आंदोलन करने की बात कही। भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और बंगाली भाषा बोलने वाले प्रवासी श्रमिकों के उत्पीडऩ की आलोचना की। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से पहले भाजपा का इसके पीछे एक राजनीतिक एजेंडा है। ममता बनर्जी ने कहा कि सिर्फ बंगाल नहीं बरन बिहार के लिए भी यही योजना बनाई गई है। सीएम ममता ने केन्द्र की मोदी सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह उन्हें डिटेंशन कैंप में डाल दे, लेकिन वह झुकने वाली नहीं है। इसी बीच सीएम ममता ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि, बीजेपी खेला होबे। जऱा इंतज़ार करो। सीएम ने दावा किया कि, टीएमसी बंगाल में और अगले चुनाव में ‘इंडिया’ दिल्ली पर कब्जा करेगी। उन्होंने भाजपा पर बंगाली भाषी प्रवासी श्रमिकों के उत्पीडऩ का आरोप लगाया और केंद्र सरकार की एक कथित अधिसूचना का जिक्र किया जिसके तहत बांग्ला बोलने वालों को गिरफ्तार किया जा सकता है।
सीएम ममता ने कहा कि, मैंने तय किया है कि मैं अब ज़्यादातर बंगाली में बोलूंगी। देखता हूं कि कोई क्या कर सकता है, हिम्मत है तो मुझे डिटेंशन कैंप में डाल दो। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है जिसमें कहा गया है कि संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ़्तार करके उन्हें हिरासत शिविरों में रखा जाए। यह अधिसूचना सभी भाजपा शासित राज्यों को भेज दी गई है। लेकिन हम इस अधिसूचना को चुनौती देंगे। आप हर बंगाली भाषी को जेल कैसे भेजेंगे? पश्चिम बंगाल के नागरिकों के पास पहचान पत्र हैं। वे दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं क्योंकि उनके पास हुनर है। वे उनसे काम तो करवाएंगे, लेकिन बांग्ला बोलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे। आपको यह अधिकार किसने दिया? क्या बंगाल भारत का हिस्सा नहीं है? सीएम मे गरजते हुए कहा कि, अगर देश में इसी तरह से बंगालियों का उत्पीडिऩ होता रहा तो वह देश भर में जगह जगह आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्हें कोई रोक नहीं सकता है। सीएम ममता बनर्जी ने आगे व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि, मुसलमानों और मतुआ समुदायों के नामों को हटाए जाने के बारे में सीएम ने कहा कि, ” वे मुसलमानों को मछली और मोरीला मछली समझ रहें है और ऐसा करके वे खुद कांटों में उलझ रहे हैं।”
मंच से रोष प्रकट करते हुए सीएम ममता ने कहा, ” वोटर लिस्ट से 12 लाख हिंदुओं और मुसलमानों के नाम हटा दिए गए हैं। राजवंशी, मतुआ, हिंदू हैं या मुसलमान, क्या वे तय करेंगे? सीएम ने कहा कि, यह दरअसल बंगाली भाषियों के खिलाफ एक साजिश है। वे अपनी मजऱ्ी से नाम हटा रहे हैं। और ऐसा करके वे ऐसी गलती कर रहे हैं !” मंच से भाजपा को सीधी चुनौती देते हुए ममता ने कहा, ” वह न केवल मुसलमानों के खिलाफ है, बल्कि हिंदू मतुआओं के भी खिलाफ है। भाजपा जितना अधिक लोगों को धर्म के नाम पर बांटना चाहेगी, हम उतना ही एकता का आह्वान करेंगे। बंगाल के लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ हम चुप नहीं रहेंगे।”








