श्रद्धाभाव व भव्यता के साथ निकलेगी भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा
– प्राचीन जगदीश मंदिर में पुरी की परंपराओं का होता है पालन
-700 वर्ष प्राचीन है शहर का जगदीश मंदिर, पूर्व में कहा जाता था लक्ष्मीनारायण मंदिर
बलराम शर्मा,
नर्मदापुरम। नर्मदांचल के प्राचीनतम जगदीश मंदिर में आज शुक्रवार से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का महोत्सव शुरू हो जाएगा। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। सायंकाल 5 बजे पूजन अर्चन के बाद भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलरामजी, बहन सुभद्रा जी को रथारूढ़ कराया जाएगा। तदोपरांत श्रद्धाभाव व गाजे बाजे के साथ रथयात्रा निकाली जाएगी। जो शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए जनकपुरी पहुंचेगी। वहां पर भगवान की आरती की जाएगी। नर्मदांचल सहित प्रदेश के अनेक मठ मंदिरों व ट्रस्ट के साधु, संतो, महंतों, पंडितों पुजारियों रामसखियों व हजारों श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है। यह रथयात्रा लगभग 10 दिन की रहेगी। शहर के अनेक स्थानों पर रथयात्रा का पड़ाव होगा।
क्षेत्र का सबसे प्राचीन है जगदीश मंदिर
मां नर्मदा के पावन तट पर देवालयों की संख्या शताधिक है। इनमें प्राचीन लक्ष्मीनारायण मंदिर जो जगदीश मंदिर के नाम प्रसिद्ध़ हुआ है। इस मंदिर में 11 वी पीढ़ी के महंत हैं नारायणदास हैं। उन्होंने बताया कि पुरी की परंपराओं के तहत यहां पर बीते करीब 100 वर्षों से रथयात्रा महोत्सव मनाया जा रहा है। मंदिर को करीब 700 वर्ष हो चुके हैं।
गुरु शिष्य परंपरा की विरासत
इतिहास की जानकार व शोधकर्ता डा हंसा व्यास का कहना है कि नर्मदा तट पर सदियों प्राचीन मंदिर विरासत समेटे हैं। जहां गुरु-शिष्य की परंपरा वर्षों पुरानी है। जगदीश मंदिर करीब 700 वर्ष पुराना है। 18 वीं सदी में मंदिर का जीर्णोंद्वार करवाया गया है।
मंदिर में प्रवेश से पूर्व मां नर्मदा के दर्शन
मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व मां नर्मदा के दर्शन होते हैं। गर्भ गृह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की काष्ठ निर्मित प्राचीन मूर्तियां हैं। प्राचीन काल में यह लक्ष्मीनारायण मंदिर हुआ करता था। तीन पीढ़ियों के बाद से जगन्नाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां पर संगमरमर का गरुड़ स्तंभ है।
93 हजार 976 रुपये में हुआ था जीर्णाेद्वार
मंदिर के जीर्णाेद्वार हुए ही लगभग 115 वर्ष हो गए हैं। मां नर्मदा के तट पर स्थित मंदिर की मजबूती आज भी दर्शनीय है। उस समय मंदिर का जीर्णाेद्वार 93 हजार 976 रुपये में हुआ था। उसके बाद ही लक्ष्मीनारायण मंदिर के नाम को जगदीश मंदिर किया गया है। ऐसा मंदिर के महंत बताते हैं।
मंदिर में महंतों की पीढ़ी
मंदिर के रिकार्ड के अनुसार जो महंत हुए हैं उनमें मंहत रिधराम दास महाराज, उनके शिष्य महंत लक्ष्मण दास महाराज, उनके शिष्य मंहत गैवीदास महाराज, उनके शिष्य महंत शीतलदास महाराज, उनके शिष्य महंत रघुनाथ दास महाराज, उनके शिष्य भगवानदास महाराज, अादि मंहत हो चुके हैं।
क्षेत्र का बड़ा उत्सव है रथयात्रा
क्षेत्र के धार्मिक महोत्सव में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा अन्य धार्मिक आयोजन की तरह एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाने वाले पर्व है। प्रतिवर्ष की भांति आषाढ़ मास शुल्क पक्ष की द्वितीया से रथयात्रा महोत्सव शुरू होकर एकादशी तक जारी रहेगा। रथयात्रा के साथ पुलिस बल भी तैनात रहेगा।







