भोपाल(ए)। मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने वाला देश भर में अग्रणी राज्य है। प्रदेश में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में हो रहा द्रुत गति से क्रियान्वयन, देश भर में चर्चा का विषय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परम्परा को लेकर हो रहे तेज गति से क्रियान्वयन से, मप्र उदाहरण के रूप में स्थापित हो रहा है। देश के अन्य राज्यों के लिए, हमारी कार्यशैली अभिप्रेरक बनें, इस आशय के साथ हमें सावधानीपूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, तीव्र गति के साथ क्रियान्वयन करते हुए आगामी लक्ष्यों के निर्धारण में, मप्र हिन्दी ग्रन्थ अकादमी का योगदान अनुकरणीय है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने शनिवार को भोपाल स्थित होटल पलाश में, मप्र हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के 55वें स्थापना दिवस समारोह में सहभागिता कर कही।
परमार ने अकादमी परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं भी प्रेषित की।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में पाठ्यक्रम एवं पुस्तक लेखन की प्रक्रिया, निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इस लक्ष्य की ओर बढऩे में, मप्र हिन्दी ग्रन्थ अकादमी लगातार क्रियाशील है। विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं मितव्ययी पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए, बाजार में भी हिन्दी ग्रन्थ अकादमी की पुस्तकें उपलब्ध कराने की आवश्यकता है; इससे शिक्षा के व्यापारीकरण पर लगाम लग सकेगी। श्री परमार ने अकादमी के लेखकों को लेखन में सावधानी बरतते हुए, व्यापक लक्ष्य की प्राप्ति की ओर बढऩे की बात कही।








