जबलपुर। हितकारिणी वुमेन्स कॉलेज ऑफ़ एजूकेशन में हितकारिणी विद्या परिषद के संयुक्त तत्वाधान में गणित शिक्षण में रचनावाद विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन, भोपाल के प्रो. अश्विनी गर्ग थे। विशिष्ट अतिथि शासी निकाय अध्यक्ष संदीप गोलछा, सदस्य श्री दीपक राठौड़ प्राचार्य डॉ. सुलक्षणा त्रिपाठी उपस्थित रहे। प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में रचनावाद के बारे में बताया कि किस तरह शिक्षक एक सुविधा प्रदाता के रूप में विभिन्न युक्तियों का प्रयोग करके विद्यार्थियों में ज्ञान का निर्माण करवाता है, इसके लिए शिक्षक को छात्रों के पूर्व ज्ञान को जानकर उन्हें सक्रिय रखकर विभिन्न गतिविधियों में सहयोग प्रदान करवा कर ज्ञान को स्थाई बनाता है, मुख्य वक्ता प्रो. अश्वनी गर्ग ने रचनावाद के पांच ‘ई‘ के महत्व के बारे में बताया। यह पांच ‘ई‘ – इंगेज, एक्सप्लोर, एक्सप्लेन, इलेबोरेट तथा इवैल्यूएशन है। शिक्षक को अपनी कक्षा मैं विद्यार्थियों को एंगेज करना चाहिए जिससे वह प्रत्यक्ष को समझने का प्रयास करें तत्पश्चात विद्यार्थियों ने जो नवीन ज्ञान प्राप्त किया है उसी के आधार पर पूर्व ज्ञान को जोड़कर संपर्क का निर्माण करना तथा नवीन परिस्थितियों में अर्जित ज्ञान का अनुप्रयोग करना सीख वह लगातार मूल्यांकन द्वारा सही प्रतिक्रियाओं का चयन करे। उन्होंने गणित के विभिन्न प्रकरणों को रचनावादी तरीके से पढ़ने के तरीकों के बारे में बताया। इस कार्यशाला में हितकारिणी सभा के द्वारा संचालित किए गए विभिन्न प्राचार्यगण, शिक्षक गण तथा कॉलेज की तृतीय सेमेस्टर की छात्राएं उपस्थित रही।
कार्यक्रम के दूसरे दिन नई शिक्षा नीति 2020 पर आधारित ’आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग ’व’ टॉय लर्निंग ’के बारे में विस्तार समझाया तथा यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार विभिन्न कहानी व खेलों के द्वारा कक्षा के विद्यार्थियों में ज्ञान के निर्माण को संभव कराया जा सकता है । समापन समारोह में मुख्य अतिथि हितकारिणी विद्या परिषद जयेश राठौर जी विशिष्ट अतिथि श्री संदीप गोलछा जी हितकारिणी विद्या परिषद के राजीव श्रीवास्तव उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन कार्यशाला की संयोजक डॉ. निरुपमा पाठक द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन आभार प्रदर्शन डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव उपप्राचार्य द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की श्रीमती वर्षा दुबे, डॉ. रश्मि शुक्ला, श्रीमती जया सामदेकर, डॉ निधि माथुर लाइब्रेरियन श्रीमती ज्योति शर्मा एवं कार्यालय कर्मचारी नितिन साहू, शाष्वत गुप्ता, श्रीमती प्रेमलता, सुधा चैधरी एवं विजय दहायत का योगदान रहा।








