बाणासुर राछस के बाड़ से उत्पन्न हुई थी गंगा मैया
जबलपुर हरे कृष्णा आश्रम भेड़ाघाट के द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार इस 13 वे वर्ष में गंगा दशहरा की पूर्व सुबह 900 फुट की चुनरी से बैंनगंगा नदी नर्मदा मैया सरस्वती मैया का श्रृंगार किया विधिवत पूजन के साथ महाआरती दुग्ध अभिषेक के साथ भंडारे का आयोजन हुआ
आश्रम के संस्थापक स्वामी रामचंद्र दास जी महाराज ने बताया बाणासुर नाम के राक्षस ने इस क्षेत्र में तपस्या कर करोड़ओ शिवलिंग की पूजा की वे सभी शिवलिंग गंगा मैया में विसर्जन करने ले जाने लगा तब भगवान शंकर ने आशीर्वाद दिया जहां से बाड मारोगे वहीं से गंगा मैया का उद्गगम होगा आज भी नर्मदा मैया के शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती सीधे पूजन चालू हो जाता है इसका पूजन पहले ही बाणासुर राछस कर चुका है
इसलिए इसका नाम बाढ़गंगा पड़ा फिर कालनांतर में बैनगंगा कहने लगे
शरद अग्रवाल ने कहा नदिया स्वच्छ रहें क्षेत्र में सुख समृद्धि शांति बनी रहे नशा मुक्ति रहे इसी उद्देश्य यह आयोजन होता है
इस अवसर पर श्रृंगेरी मठ से जुड़े राजराजेश्वरी धाम से पधारे दक्ष ब्रह्मचारी नर्मदा महाआरती के संस्थापक डॉ सुधीर अग्रवाल जय किशन गुप्ता सुषमाशंकर पटेल मनमोहन दुबे श्याम मनोहर पटेल विनोद दीवान मनोज गुलाबवानी सुरेश विश्वकर्मा कैलाश विश्वकर्मा विशाल पंड्याआदि उपस्थित थे








