सनातन धर्म के संरक्षण संवर्धन में आद्य शंकराचार्य जी का महान योगदान

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भगवान आद्य शंकराचार्य जी के कारण ही आज सनातन धर्म सुरक्षित और संरक्षित है। आद्य शंकराचार्य जी ने सनातन के मूल सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की। उन्होंने लोगों को बताया कि ज्ञान,भक्ति और वैराग्य से ही कैवल्य मोक्ष पाया जा सकता है। उक्त उद्गार आद्य शंकराचार्य जी के 2532 वें प्राकट्योत्सव पर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज द्वारा संस्थापित आदित्य वाहिनी द्वारा आयोजित समारोह में आचार्य परिषद के राष्ट्रीय संयोजक डॉ.एच. पी. तिवारी ने व्यक्त किए। आदित्य वाहिनी के संयोजक जीवेश पांडे ने कहा कि भगवान आद्य शंकराचार्य जी के बताए मार्ग पर चलकर सम्पूर्ण मानवता का कल्याण हो सकता है।
इस अवसर पर शिक्षा सलाहकार डॉ. श्रद्धा तिवारी,समाजसेवी सचिन अवस्थी, कुसुम कली मिश्रा,राजेंद्र तिवारी, संतोष दुबे,आशुतोष तिवारी, श्रेयांश तिवारी,अदिति श्रीवास्तव, सुमन शर्मा,मधुबाला शर्मा व विनीता पगारे सहित बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी उपस्थित थे।

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