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रेलवे संरक्षा जागरूकता अभियान के तहत दूसरा सप्ताह

अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (युएसएफडी) मशीनों के जरिए रेल पटरियों की सूक्ष्म जाँच

जबलपुर 30 अप्रैल। रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत चार सप्ताह में रेलवे में संरक्षा से सम्बंधित चार जागरूकता अभियान चलाने की पहल की जा रही है। इसी कड़ी में दूसरे साप्ताह में अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) क्या है, मशीन कैसे काम करती है से संबंधित जांच अभियान चलाया गया। जिसके अंतर्गत दूसरे सप्ताह में सोमवार को भोपाल मण्डल एवं मंगलवार को जबलपुर मंडल द्वारा रेलवे संरक्षा अभियान चलाया गया।
गौरतलब है कि रेल पटरियों की आंतरिक संरचना की सूक्ष्म जांच के लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (युएसएफडी) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह नवीनतम तकनीक रेल की पटरियों में समय के साथ उत्पन्न होने वाले आंतरिक दोषों को प्रारंभिक अवस्था में ही चिन्हित कर लेती है, जिससे आवश्यक अनुरक्षण कार्य समय पर पूरा किया जा सके और यात्री एवं मालगाड़ियों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित रह सके।
पश्चिम मध्य रेल में रेलवे ट्रैक की नियमित रूप से युएसएफडी मशीनों द्वारा जांच की जा रही है। इस जांच की आवृत्ति ट्रेनों के आवागमन के घनत्व (जीएमटी) पर आधारित होती है और तीनों मण्डलों के विभिन्न सेक्शनों में प्रत्येक दो से चार माह में ट्रैक की जाँच की जाती है। तीनों मंडल में युएसएफडी टीमों का गठन किया गया है, जो ट्रैक की आंतरिक स्थिति को डिजिटल रूप में दर्ज कर तुरंत विश्लेषण की सुविधा प्रदान करती हैं। वेल्ड की सटीक जांच हेतु सभी टीमों को डिजिटल वेल्ड टेस्टर भी प्रदान किए गए हैं, जिससे वेल्डिंग खामियों का सटीकता से पता लगाया जा सके। ट्रैक जांच के दौरान संपूर्ण कार्य का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, जिसे विश्लेषण कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
भोपाल मंडल :- वर्तमान में लगभग 2000 किलोमीटर ट्रैक की नियमित रूप से युएसएफडी मशीनों द्वारा जांच की जा रही है। मंडल में वर्तमान में कुल 08 युएसएफडी टीमों का गठन किया गया है, जिनमें 15 प्रशिक्षित इंजीनियर कार्यरत हैं। वर्ष 2024-25 में मंडल के स्तर पर 10,000 किलोमीटर ट्रैक, 34,000 वेल्ड, 4704 टर्नआउट और 4498 स्वीच एक्सपेंशन जॉइंट्स की सूक्ष्मता से जांच की गई। इस जांच के दौरान 861 फ्लॉ चिन्हित किए गए, जिनकी तत्काल मरम्मत कर दी गई ।
जबलपुर मण्डल :- वर्तमान में लगभग 2582 किलोमीटर ट्रैक की नियमित रूप से USFD मशीनों द्वारा जांच की जा रही है। मंडल में वर्तमान में कुल 13 युएसएफडी टीमों का गठन किया गया है, जिनमें 13 मशीने एवं 26 प्रशिक्षित इंजीनियर कार्यरत हैं। यूएसएफडी परीक्षण को 100% बी-स्कैन 9 चैनल रेल परीक्षण मशीन में अपग्रेड किया है। यूएसएफडी टीम ने वित्त वर्ष 2023-24 में 10112.68 किलोमीटर ट्रैक पर परीक्षण किया है, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 9114.73 किलोमीटर ट्रैक के लक्ष्य से 10.95% अधिक है। यूएसएफडी टीम ने वित्त वर्ष 2024-25 में 11211.437 किलोमीटर ट्रैक का परीक्षण किया है, जो 2023-24 के लक्ष्य से 86.43 किमी अधिक है और वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 10.87% अधिक है। सावधानीपूर्वक और विस्तृत यूएसएफडी परीक्षण और विवरण के माध्यम से यूएसएफडी परीक्षण से 82 रेल, 76 बेल्ड रेल दोषों को हटाया गया है।
अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (युएसएफडी) तकनीक आज भारतीय रेलवे की संरक्षा प्रणाली का एक अविभाज्य अंग बन चुकी है। यह न केवल ट्रैक की विश्वसनीयता और स्थायित्व को सुनिश्चित करती है, बल्कि समय रहते खतरों की पहचान कर संभावित दुर्घटनाओं की रोकथाम में भी सहायक सिद्ध हो रही है। पश्चिम मध्य रेलवे इस तकनीक के कुशल क्रियान्वयन से ट्रेनों के संरक्षित संचालन की दिशा में लगातार सफलताएं अर्जित कर रहा है।

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